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अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी की 62 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की हुई घोषणा

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लखनऊ। 

सपा ने रविवार को अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा की है। इसमें अखिलेश यादव को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रो. रामगोपाल यादव को प्रमुख महासचिव बनाने के साथ ही मोहम्मद आजम खान, शिवपाल सिंह यादव और स्‍वामी प्रसाद मौर्य को महासचिव बनाया गया है। सपा के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से पार्टी के 62 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सूची साझा की गयी है। सूची के अनुसार, फिर अखिलेश यादव को राष्ट्रीय अध्यक्ष, किरणमय नंदा को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, राम गोपाल यादव को राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव बनाया गया है। इसके अलावा मोहम्मद आजम खां, शिवपाल सिंह यादव, स्वामी प्रसाद मौर्य, रवि प्रकाश वर्मा, बलराम यादव सहित 14 राष्ट्रीय महासचिव होंगे। सुदीप रंजन सेन पार्टी के कोषाध्यक्ष होंगे, जबकि सदस्यों के अलावा 19 राष्ट्रीय सचिव होंगे।

सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद शिवपाल सिंह यादव ने पिछले वर्ष के आखिरी महीने में मैनपुरी में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव के लिए जमकर चुनाव प्रचार किया। चुनाव में सपा की भारी जीत के बाद उन्होंने पार्टी का झंडा थाम लिया। उन्होंने 2018 में अपनी अलग प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) का गठन किया था और 2019 का लोकसभा चुनाव लड़े थे। हालांकि, 2022 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव के बीच नजदीकी होने के बाद शिवपाल ने सपा के ही निशान पर विधानसभा चुनाव लड़ा। जसवंतनगर से विधायक बनने के बाद फिर से अखिलेश यादव से उनकी दूरी हो गयी थी।

मुलायम सिंह के छोटे भाई शिवपाल सिंह यादव से अखिलेश यादव मैनपुरी उपचुनाव में चौथी बार मतभेद दूर कर एक हुए थे। इसके बाद से चाचा-भतीजा के रिश्ते मजबूत हुए हैं। सपा की कार्यकारिणी में राम चरित मानस पर विवादित बयान देने वाले स्‍वामी प्रसाद मौर्य को भी राष्‍ट्रीय महासचिव के रूप में महत्वपूर्ण पद मिला है। दरअसल, स्वामी प्रसाद मौर्य ने पिछले रविवार को एक बयान में श्रीरामचरितमानस की एक चौपाई का जिक्र करते हुए इसे महिलाओं तथा पिछड़ों के प्रति अपमानजनक करार दिया था। इस पर पाबंदी लगाने की मांग की थी। उनके इस बयान पर खासा विवाद उत्पन्न हो गया था। संत समाज और हिन्दूवादी संगठनों ने इसका कड़ा विरोध किया था। इस मामले में मौर्य के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हुआ है।

इसके अलावा 2022 के चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी छोड़कर सपा में शामिल होने वाले पूर्व मंत्री लालजी वर्मा और राम अचल राजभर को भी राष्‍ट्रीय महासचिव बनाया गया है। सपा में विशंभर प्रसाद निषाद, अवधेश प्रसाद, इंद्रजीत सरोज, रामजीलाल सुमन, जो एंटोनी, हरेंद्र मलिक और नीरज चौधरी को भी राष्‍ट्रीय महासचिव का दायित्व सौंपा गया है। डॉ. मधु गुप्ता, कमाल अख्‍तर, दयाराम पाल, राजेंद्र चौधरी, राजीव राय, राम बख्‍श वर्मा, अभिषेक मिश्रा, जावेद आब्दी, रमेश प्रजापति, पीएन चौहान, आकिल मुर्तजा, अखिलेश कटियार, रामआसरे विश्वकर्मा, तारकेश्वर मिश्रा, हाजी इरफान अंसारी, रामराज पाल, त्रिभुवन दत्त, राममूर्ति वर्मा और वीरपाल यादव को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है।

विशेष रूप से जया बच्‍चन, राम गोविंद चौधरी, अबू आसिम आजमी और लीलावती कुशवाहा जैसे नेताओं को भी कार्यकारिणी की जगह दी गयी। इस 62 सदस्यीय कार्यकारिणी में अल्ताफ अंसारी, किसान सिंह सैंथवार, व्यास जी गौड़ और मौलाना इकबाल कादरी को विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। कार्यकारिणी गठन को समाजवादी पार्टी की लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारियों के रूप में देखा जा रहा है।

अमित शाह जम्मू से कश्मीर तक यात्रा क्यों नहीं करते- राहुल गांधी

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नई दिल्ली। 

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को भारतीय जनता पाटर्ी पर निशाना साधते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद भी कश्मीर के हालात में जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं हुआ है। कश्मीर की स्थिति पर राहुल गांधी ने कहा कि लक्षित हत्याएं और बम विस्फोट नियमित रूप से हो रहे हैं और यह भाजपा सरकार के स्थिति में सुधार के दावे को झूठलाता है। उन्होंने कहा,‘‘अगर स्थिति इतनी ही अच्छी है तो भाजपा के लोग जम्मू से लाल चौक तक की यात्रा क्यों नहीं करते? अगर स्थिति इतनी ही सुरक्षित है तो अमित शाह जम्मू से कश्मीर तक क्यों नहीं जाते? इसलिए मुझे नहीं लगता कि बेहतर स्थिति वाला तकर् सही है।''

भारत-चीन गतिरोध पर राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि चीन से निपटने का तरीका उन्हें द्दढ़ता और स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि वे हमारी जमीन पर कब्जा किए हुए हैं जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने के बाद आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘प्रधानमंत्री देश के एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जिन्हें लगता है कि चीनियों ने भारत की कोई जमीन नहीं ली है। मैं हाल ही में कुछ पूर्व सैनिकों और यहां तक कि लद्दाख के कुछ प्रतिनिधिमंडल से मिला, जिन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि 2000 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र पर चीन ने कब्जा कर लिया है और कई पेट्रोलिंग प्वाइंट ऐसे हैं जिसपर चीन का कब्जा है।''

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि चीन से निपटने का तरीका उन्हें द्दढ़ता से और स्पष्टता के साथ बताना चाहिए कि वे भारतीय जमीन पर कब्जा किए हुए हैं और हम उसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। राहुल गांधी ने कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा ‘नया कश्मीर' वाले नारे का कोई आधार नहीं है क्योंकि जब मैं जम्मू कश्मीर से गुजरा तो मुझे दुख हुआ कि यहां और लद्दाख में कोई भी व्यक्ति खुश नहीं है। अपने परनाना स्वर्गीय जवाहर लाल नेहरू द्वारा लगभग 75 वर्षों पहले लाल चौक पर तिरंगा फहराने के ऐतिहासिक क्षण के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने  कहा कि वह वर्तमान जम्मू-कश्मीर की स्थिति को देखकर दुखी हैं।

राहुल ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया और राज्य का दर्जा बहाल करना अनिवार्य है तथा यह जम्मू कश्मीर के लोगों का मौलिक अधिकार है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भाजपा ने देश के संस्थानों को बर्बाद कर दिया है। उन्होंने कहा,‘‘मुझे लगता है कि आरएसएस और भाजपा जो कर रहे हैं वह देश की अवसंरचना, न्यायपालिका, मीडिया आदि पर हमला है, जम्मू कश्मीर में जो हो रहा है वह इस बात का सबूत है। जब हम संसद में बात करते हैं तो हमारे माइक खामोश कर दिए जाते हैं। जहां तक मेरा सवाल है, जम्मू-कश्मीर के लिए पहला कदम राज्य का दर्जा और लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली है।''

हाईकोर्ट का अहम फैसला, कहा- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार अभद्र भाषा के इस्तेमाल का नहीं

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प्रयागराज। 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि सोशल मीडिया विचारों के आदान-प्रदान के लिए एक वैश्विक प्लेटफॉर्म है। इसके माध्यम से व्यक्ति अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अपने अधिकार का प्रयोग कर सकता है, लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नागरिकों को सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी के बिना बोलने का अधिकार नहीं देती है और न ही यह भाषा के हर संभव उपयोग के लिए मुक्त लाइसेंस प्रदान करती है।

न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव की एकल पीठ ने नंदनी सचान के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द करने से इनकार करते हुए यह टिप्पणी की। नंदिनी सचान पर आईटी अधिनियम की धारा 67 के तहत पुलिस स्टेशन नवाबाद, झांसी में मामला दर्ज किया गया है। उन पर आरोप है कि कथित तौर पर उन्होंने शिकायतकर्ता की तस्वीर के साथ छेड़छाड़ करते हुए उसे इंटरनेट पर अपशब्दों का प्रयोग करके पोस्ट किया। अभियुक्त / याची नंदिनी सचान ने न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा पारित संज्ञान आदेश तथा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में लंबित मामले की पूरी कार्यवाही को रद्द करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।

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