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दिव्य होगी काशी की देव-दीपावली - मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

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30 को काशी आ रहे हैं पीएम मोदी, सीएम योगी ने की तैयारियों की समीक्षा

वाराणसी।

 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि इस बार काशी की देव-दीपावली दिव्य होगी। धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखने वाले इस पर्व पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की काशी में उपस्थिति समारोह को विशिष्ट शोभा प्रदान करेगी। प्रधानमंत्री के विभिन्न कार्यक्रमों के सुव्यवस्थित आयोजन और देव-दीपावली को भव्य-दिव्य बनाने के लिए प्रदेश सरकार कोई कमी नहीं छोड़ेगी। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, शुक्रवार को वाराणसी में 30 नवम्बर को प्रधानमंत्री के आगमन के दृष्टिगत तैयारियों की समीक्षा कर रहे थे। दोपहर बाद करीब तीन बजे खजूरी पहुंचे सीएम योगी ने पीएम मोदी के जनसभा स्थल पर हो रही तैयारियों को देखा। इसके बाद सीएम का काफिला डोमरी पहुँचा, जहां उन्होंने क्रूज से राजघाट और भैंसाकुण्ड घाट तक भ्रमण क़िया। सीएम ने घाट किनारे चल रही तैयारियों को बारीकी से देखा और आवश्यक निर्देश दिए। संभावना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां गंगा-विहार करेंगे। 

संत रैदास को योगी ने किया नमन

 राजघाट पहुंचे सीएम योगी आदित्यनाथ ने यहाँ संत शिरोमणि रविदास मंदिर में माथा टेका। इस दौरान योगी ने आगंतुक पंजिका में अपना संदेश लिखा। योगी ने लिखा "सिद्ध संत रविदास जी की पावन स्थली पर आज दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। संत रविदास जी ने अपनी साधना से भारत की सनातन परंपरा को नई पहचान दी। ऐसे पूज्य संत को कोटि-कोटि नमन"। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां गंगा-विहार करेंगे। 

काशी विश्वनाथ धाम के कार्यों का लिया जायजा

 वाराणसी भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री ने श्री काशी विश्वनाथ मंदिर भी गए और काशी विश्वनाथ कॉरीडोर के कामों की प्रगति को जाना। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार 30 नवम्बर को पीएम मोदी यहां भी आएंगे। श्री काशी विश्वनाथ के दर्शन करने के बाद वह राजघाट में एक संक्षिप्त कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे।  प्रधानमंत्री द्वारा घाट पर दीपदान किया जाएगा। शाम को सर्किट हाउस में अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा करते हुए सीएम योगी ने देव दीपावली कार्यक्रम को सुव्यवस्थित और ऐतिहासिक बनाने के लिए हर सम्भव प्रयास करने के निर्देश दिए। सीएम योगी ने सारनाथ में भगवान बुद्ध की पुण्य स्थली का भी दौरा किया और भगवान बुद्ध की जीवन पर आधारित लाइट एंड साउंड शो का अवलोकन भी किया।

SC ने बढ़ाई अर्नब की अंतरिम जमानत अवधि, हाईकोर्ट को लगाई फटकार

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नई दिल्ली। 

उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि दो साल पुराने आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में पत्रकार अर्नब गोस्वामी और दो अन्य को दी गई अंतरिम जमानत तब तक जारी रहेगी जब तक बंबई उच्च न्यायालय याचिका का निपटारा नहीं कर देता और साथ ही कहा कि न्यायपालिका को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आपराधिक कानून नागरिकों का चुनिंदा तरीके से उत्पीड़न करने के लिए हथियार ना बनें। उच्चतम न्यायालय ने अर्नब को 11 नवंबर को अंतरिम जमानत दी थी। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ ने इस मामले में टीवी पत्रकार और दो अन्य को राहत देने के कारणों पर प्रकाश डाला। पीठ ने कहा कि आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में दायर याचिका पर बंबई उच्च न्यायालय के फैसला करने के दिन से चार सप्ताह बाद तक पत्रकार अर्नब गोस्वामी की अंतरिम जमानत कायम रहेगी। 

पीठ ने यह भी कहा कि उच्चतम न्यायलय,उच्च न्यायालयों, निचली अदालतों को राज्य द्वारा आपराधिक कानून के दुरुपयोग के प्रति सतर्क रहना चाहिए। उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आपराधिक कानून नागरिकों को चुनिंदा तरीके से उत्पीड़ित करने का हथियार ना बनें। पीठ ने कहा,‘‘ उन नागरिकों के लिए इस अदालत के दरवाजें बंद नहीं किए जा सकते, जिन्होंने प्रथम दृष्टया यह दिखाया है कि राज्य ने अपनी शक्ति का दुरुपयोग किया।’’ साथ ही कहा कि एक दिन के लिए भी किसी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता छीनना गलत है। उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में दो आरोपियों एन सारदा और फिरोज मोहम्मद शेख को 50-50 हजार रुपए के निजी मुचलके पर अंतरिम जमानत दी और उन्हें सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करने और जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए।

कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली चलो मार्च,पुलिस ने सिंघु बॉर्डर सीमा पर दागे आंसू गैस के गोले

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नई दिल्ली। 

केन्द्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ ‘दिल्ली चलो’ मार्च के तहत सिंघु बॉर्डर पर पहुंचे किसानों के एक समूह को तितर-बितर करने के लिए दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को आंसू गैस के गोले दोगे। दिल्ली और हरियाणा को जोड़ने वाले सिंघु बार्डर पर आंसू गैस के गोले दागे गए। पुलिस के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘हम किसानों को प्रदर्शन करने से रोकने के लिए आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल कर रहे हैं। हम उन्हें यह भी बता रहे हैं कि कोविड-19 वैश्विक महामारी के मद्देनजर किसी प्रकार की रैली करने या धरना देने की अनुमति नहीं है।’’

अधिकारी ने कहा, ‘‘ उन्हें अनुमति नहीं दी गई और अगर उन्होंने दिल्ली में दाखिल होने की कोशिश की तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।’’ सीमा पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और रेत से भरे ट्रक तथा पानी के टैंक भी वहां तैनात हैं। प्रदर्शनकारियों को शहर में प्रवेश करने से रोकने के लिए सिंघु बॉर्डर पर बाड़ लगाने के लिए कांटेदार तार का भी उपयोग किया जा रहा है। तीस से अधिक किसान संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले पंजाब के किसानों ने घोषणा की थी कि वे लालडू, शंभू, पटियाला-पिहोवा, पातरां-खनौरी, मूनक-टोहाना, रतिया-फतेहाबाद और तलवंडी-सिरसा मार्गों से दिल्ली की ओर रवाना होंगे। सभी सीमाओं पर तनाव कायम है। 

‘दिल्ली चलो’ मार्च के लिए किसान अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर राशन और अन्य आवश्यक सामान के साथ एकत्रित हो गए हैं। हरियाणा सरकार ने किसानों को प्रदर्शन के लिए एकत्रित होने से रोकने के लिए कई इलाकों में सीआरपीसी की धारा 144 भी लागू कर दी है। किसान नये कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि नये कानून से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था समाप्त हो जाएगी।

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