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देश के किसानो को तत्काल मदद की जरूरत है - लेमन मैन रायबरेली

Tuesday, April 28, 2020

/ by Editor
रायबरेली 


लॉकडाउन से ठप पड़ी खेती-किसानी को गति देते हुए रबी फसलों की खरीद स्वा तवमीनाथन समीति की रिपोर्ट सी-2 के तहत सुनिश्चित की जाए, यदि से लागू करने में कोई विशेष अड़चन  हो तो, अंतरिम राहत के रूप में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 25 प्रतिशत बढ़ोतरी तत्काल की जाए। यह निर्णय जल्द लेना आवश्यक है क्योंकि रबी की फसल मंडी में पहुंच रही है।  कृषि तथा कृषि संबंद्ध सभी प्रकार के ऋणों की अदायगी एक साल के लिए निलंबित किये जाएं।  किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ा कर दो गुनी की जाए तथा ब्याज दर 1% हो।

किसानों को खाद ,बीज ,दवाई ,कृषि यंत्र ,ट्रैक्टर, ड्रिप इरिगेशन स्प्रिंकलर सोलर पंप, ड्रायर, पाली हाउस, नेट हाउस,  रोपनी आदि कृषि विभाग उद्यानिकी विभाग राष्ट्रीय मेडिसिनल प्लांट बोर्ड ,मसाला बोर्ड, आदि की समस्त योजनाओं में किसानों को  '"खुले बाजार से प्रतियोगी दरों पर तत्संबंधी आवश्यक सामग्री  खरीदी करने की अनुमति प्रदान की जाए"  तथा ग्राम पंचायत स्तर पर खरीदी के विधिवत प्रमाणीकरण के उपरांत प्रदाय की जा रही अनुदान की राशि किसान के खाते में सीधे जमा की जाये । प्रधानमंत्री किसान सम्मान राशि सालाना  6000 रुपये से बढ़ा कर 24,000 रुपये की जाए, तथा किसानों को बूस्टर रिलीफ  के रूप में 2 किस्तें एक साथ  प्रदान की जाएं।

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता होने का लाभ किसानों को भी डीजल का भाव सस्ता कर पहुंचाया जाएं.इससे रासायनिक उर्वरकों की कीमत घटाने में मदद मिलेगी। अतः पोटाश व डीएपी खाद की कीमतों में चौथाई हिस्से की छूट दी जाए।  जैविक उत्पादों के विश्व बाजार में भारत को सिरमौर बनाने हेतु,जैविक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, वर्तमान वैश्विक जैविक बाजार के मापदंडों के अनुरूप विज्ञान सम्मत "राष्ट्रीय जैविक कृषि नीति" की घोषणा की जाए। जैविक किसानों द्वारा बनाए गए जैविक खाद पर भी रासायनिक खाद पर दी जा रही अनुदान की एकड़ दर से अनुदान राशि, सीधे किसानों के खाते में  अंतरित किए जाएं। (इस संदर्भ में मांगे जाने पर विस्तृत सुझाव तथा कार्य योजना हमारी विशेषज्ञ समिति के द्वारा पृथक से प्रस्तुत की जायेगी)

कृषि कार्यों में मनरेगा मजदूरों को अंगीकार किया जाए। ग्राम पंचायत के स्तर पर मजदूरी दर निर्धारण तथा अंतर राशि भुगतान के प्रमाणीकरण के अधिकार दिए जाएं। इसके साथ ही अंतर राशि का भुगतान सरकार द्वारा मनरेगा से किया जाए। सरकार दूध और दुग्ध उत्पादों की खरीद फरवरी के दर पर ही सुनिश्चित करे। दुग्ध उत्पादों को गरीबों, मरीज़ों, बच्चों, क्वारंटाइन केंद्रों में बांटे।

कृषि कार्यों में उपयोग हेतु बिजली आधे दर पर उपलब्ध करायी जाए। मुर्गीपालन, मत्स्यपालन, व अन्य पशुपालन कर रहे किसानों की सप्लाई चेन, बिक्री की व्यवस्था को सुचारू रूप से चलवाएं।  कृषि यंत्रों, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, कीटनाशक, खाद आदि पर लगने वाली जीएसटी समाप्त करें। लॉकडाउन के दौरान किसान अपनी खेतों में सहजता से काम कर पाएं, यह सुनिश्चित हो।

मंडियों में आढ़तियों की मनमानी खत्म हो, और किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिलना सुनिश्चित हो सके,न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम मूल्य पर खरीदी को संंज्ञेय अपराध घोषित करने संंबंंधी कानून बनाया जाए। वर्तमान में बिचौलिए किसान का गेहूं  1400 रुपए क्विंटल और चना  3400 रुपए  क्विंटल  की दर  पर खरीद रहे हैं जबकि गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1950 प्रति क्विंटल कथा चना का न्यूनतम समर्थन मूल्य ₹4875 प्रति क्विंटल है। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी बहुत ही कम हो पा रही है, विश्वास करें यही हकीकत है।  किसान, किसान उत्पादक संगठन (एफ पी ओ), सहकारी समितियों को मंडियों में ही विक्रय  की बाध्यता से मुक्त किया जाए। इन को खुले बाजार में भी विपणन में स्वतंत्रता दी जाए, इससे बाजार में स्वस्थ प्रतियोगिता का विकास होगा।
कृषि में निवेश को आकर्षक बनाया जाए। (इस संदर्भ में मांगे जाने पर विस्तृत सुझाव तथा कार्य योजना हमारी विशेषज्ञ समिति के द्वारा पृथक से प्रस्तुत की जावेगी)

किसानों को कृषि उत्पाद के निर्यात के लिए निर्यात प्रोत्साहन देना चाहिए। अंतर्राष्ट्रीय कृषि बाजार से भारतीय किसानों का सीधा संपर्क स्थापित हो जैविक प्रमाणिकरण पद्धति का सरलीकरण  किया जाए तथा इससे सस्ते से सस्ता बनाया जाए । कृषि उत्पादों के मूल्य निर्धारण (अंतर्राष्ट्रीय) को लेकर पारदर्शी व्यवस्था। देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कर दें हेतु विश्व व्यापार संगठन के ,"पीस प्रावधानों"  की सुरक्षाछतरी के बजाय इनके दीर्घकालिक टिकाऊ समाधान ढूंढे जाएं ।

कृषि कार्यों में सहकारी प्रणाली को बढ़ावा देना तथा कृषि कार्यों में संतुलित, टिकाऊ लघु मशीनीकरण को विकसित किया जाए । विपणन प्रणाली को सुदृढ़ करते हुए पारदर्शी बनाया जाए  तथा इसमें किसानों की निर्णायक सहभागिता सुनिश्चित की जाए । नवाचारों एवं नूतन आविष्कारों को यथाशीघ्र किसानों के उपयोग हेतु तकनीक स्थानांतरण सुनिश्चित हो । कृषि क्षेत्र में प्रशासनिक-तकनीकी सुधार के लिए केंद्रीय स्तर पर भारतीय कृषि सेवा का गठन किया जाए ।

देश में कृषि शिक्षा और कृषि अनुसंधान को बढ़ावा देते हुए, आईसीएआर तथा किसान विज्ञान केंद्रों को नवाचार के लिए प्रेरित करना, भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस)  की तर्ज पर भारतीय कृषि सेवा संवर्ग की तत्त्काल स्थापना करना, तथा पर्याप्त बजटीय आवंटन से सुसज्जित करना, ( (इस संदर्भ में मांगे जाने पर विस्तृत सुझाव तथा कार्य योजना हमारी विशेषज्ञ समिति के द्वारा पृथक से प्रस्तुत की जावेगी) । कृषि विपणन, सिंचाई, मशीनरी, इनपुट वितरण प्रणाली, कोल्ड चेन की अवसंरचना में विकास करना

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