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गरीब मजदूरों की व्यथा सुनने वाला कौन

Wednesday, May 20, 2020

/ by Editor

हरिकेश यादव-संवाददाता (इंडेविन टाइम्स)

अमेठी।
कोविड-19 के प्रकोप के कारण जहां पूरे देश  में लॉक डाउन की प्रक्रिया प्रभावी है  वहीं पर  देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी ने कारखानों , कंपनियों व उद्योगपतियों से  आग्रह किया था कि  इस लाक डाउन में गरीबों व मजदूरों को पूरे 3 महीने तक उन्हें यथोचित सैलरी दे है और उन्हें काम से ना निकाले ।लेकिन उनके आदेशों को कंपनी, कल कारखाना ,ईट भट्टे के मालिकों व उद्योगपतियों ने सिरे से नकार दिया है ।वह मजदूरों को एक भी पैसे देने को तैयार नहीं है ।इस स्थिति में मजदूरों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। उनकी इस व्यथा पर कोई भी आंसू पूछने वाला नहीं है ।

वह दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। देश व प्रदेश की जनता जिन लोगों से सहायता की उम्मीद लगाए बैठी हुई है वह मुंह फेर लिए हैं ।ऐसे में मजदूर वर्ग के लोगों को संकट की घड़ी  से बचाने कौन मसीहा के रूप में सामने आता है जो उनका दुख-दर्द दूर करने में मदद करेगा। ऐसे गरीब मजदूर जो 10 -15 साल से अपने मालिक के साथ जी तोड़ मेहनत करके उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलते थे और मालिक उन्हें सांत्वना भी देते थे कि जब भी कोई संकट आएगा वह तुम्हारे साथ खड़े रहेंगे ।लेकिन कोरोना जैसा संकट आते ही मालिकों ने अपने हाथ खड़ा कर लिए। वह मजदूरों को उनके काम के पैसे भी नहीं दिए हैं सहायता की बात तो अलग ही है। इस लाक डाउन में बिना लाइसेंस के लगने वाली सड़कों पर दुकाने ज्यादातर रोजी रोटी कमाने वाले गरीबों की थी ।

संकट की इस घड़ी में तहसील, बस स्टेशन ,रेलवे स्टेशन ,ब्लॉक ,चौराहे व मुख्य संपर्क मार्गों पर ठेला लगाकर रोजी-रोटी कमाने वाली मजदूर नदारद है ।जो मजदूर  काम की तलाश में शहरों में जाते थे आज उनकी काम धंधे बंद है ।शहर के किराना स्टोर के मालिकों के यहां जो मजदूर वर्ग के लोग रहते थे। आज के समय में उन्हें भी काम से निकाल दिया गया है ।जिससे वे आजीविका के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बाजार में आप कहीं भी सामान लेने जाइए तो लाक डाउन का बहाना बनाकर मनमाने दामों पर दुकानदार सामान मुहैया करा रहे हैं ।ऑनलाइन भुगतान करने के संदर्भ में दुकानदार कन्नी काटने लगते हैं कहते हैं कि उन्हें नगद पैसा चाहिए तभी सामान मिलेगा क्योंकि हम लोगों को नगद पैसे देने पर ही समान मिल रहा है ।

जबकि हकीकत इससे परे है ,ऑनलाइन भुगतान करने पर पैसा सीधे ही दुकानदारों के खातों में ट्रांसफर हो जाता है जिससे वह इनकम टैक्स के दायरे में आ जाते हैं ।इनकम टैक्स से बचने के लिए दुकानदार चेक व ऑनलाइन भुगतान से बचने का बहाना बना रहे हैं। यदि इस समय इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की टीम दुकानदारों के यहां छापा मारकर कार्यवाही करें तो सच सबके सामने आ जाएगा ।

अमेठी जिले के ज्यादातर मुख्य बाजार  रामगंज ,टीकरमाफी, पीपरपुर, दुर्गापुर भेंटुवा,भादर,त्रिशुंडी ,अयोध्यानगर, हथकिला, ठेंगहा ,रानीपुर, कालिकन, संग्रामपुर ,कल्यानपुर, डेढ़ पसार, गोसाईगंज ,महाराजपुर सहित अन्य स्थानों के दुकानदार करोड़ों की टैक्स चोरी करके भारत सरकार को चूना लगा रहे हैं। सरकार को इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है आखिरकार लाखों और करोड़ों टर्नओवर करने वाले दुकानदार जीएसटी बिल का भुगतान क्यों नहीं करते। जब कभी भी दुकानदारों से कहासुनी की नौबत आती है तो शादी पर्ची पर बिल बना कर दे देते हैं ।जिस पर दुकानदार का नाम, पता ,पिन नंबर ,टिन नंबर सब कुछ गायब रहता है उसके बाद भी वह स्वयं को सबसे बड़ा ईमानदार मानते हैं।

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