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स्वच्छ पत्रकारिता ही समाज का दर्पण

Sunday, May 3, 2020

/ by Editor

हरिकेश यादव-संवाददाता (इंडेविन टाइम्स)

अमेठी।

सबकी निगाहें पत्रकारिता पर सदैव लगी रहती हैं। इसकी स्वतंत्रता के लिए पत्रकारों को हमेशा  संघर्ष करना पड़ता है। निष्पक्षता व सजगता ना रहने पर अक्सर खरी खोटी बातें भी सुनने को मिलती है। लेकिन समय-समय पर अपना रंग जरूर मीडिया दर्शाती हैं। अच्छे विचार, अच्छी बातें ,अच्छी दुनिया, अच्छी स्वतन्त्रता किसे लुभावने नहीं लगते हैं। सब कुछ कर्म से मिलता है। इसके लिए निरन्तरता व स्पष्टता का होना आवश्यक है । तभी तो पत्रकार को दुनिया का प्रहरी माना जाता है। 

अदृश्य बातें भी साकार कर देने के लिए अदम्य साहस होता है। हिंसात्मक गतिविधियों को विराम लगाने में भी अहम भूमिका मीडिया सदैव निभाती रहती है । कोरोना वायरस महामारी से लड़ाई लड़ने में पूरी दुनिया को सजग करने में पत्रकारिता की मुख्य भूमिका देखने को मिली। महामारी के लडाई में पत्रकारों को उतनी सुरक्षा नहीं मिलती जितनी आवश्यक होती है ।फिर भी खबर के खोज के लिए जान जोखिम में डालकर समाज को आईना दिखाने से मीडिया ने  कभी भी गुरेज नहीं किया। कितने पर्दों को  बेपर्दा करके समाज को अच्छी खबर परोसने की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ती है। 

जान की परवाह भी ना करना आदत सी बन जाती है। इसकी स्वतंत्रता की लक्ष्मण रेखा का अनुमान परखा नहीं जा सकता है। सरकार से सरकारी मशीनरी तक नये-नये कायदे कानूनों को परखने मे वक्त नहीं लगता है। न्याय के दीपक को प्रकाश भी समाचार पत्रों से मिलता है। समाचार पत्र की लकीरें ही सच्चाई को कभी-कभी रोशनी देतीं हैं। जो देश, समाज के लिए नजिर होती हैं। सामायिक खबरें ही मीडिया पर जमी राख को साफ कर संबल प्रदान करती है। 

विश्व प्रेस स्वतन्त्रता दिवस से लोगों के बीच एक नई चेतना सी आ जाती है। जो पूरी दुनिया को संजीवनी के रूप में लोग आत्मसात करते हैं।पत्रकार प्रदीप कुमार त्रिपाठी कहते हैं कि समाचार पत्र पूरी दुनिया का आइना है। समाचार पत्र की खबरें ही स्वतंत्रता की दीवार हैं। इस पर आच नहीं आना चाहिए। पत्रकार राजेंद्र पाण्डेय कहते हैं कि मीडिया की स्वतंत्रता ही दुनिया में देश का स्थान तय करता है।

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