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'चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से'- नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान

Sunday, June 21, 2020

/ by Editor
                                                    नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान ( लखनऊ )

मैं आज जब प्रपंच चबूतरे पर पहुंचा तो चतुरी चाचा बड़ी गम्भीर मुद्रा में बैठे थे। कासिम चचा उन्हें और मुंशीजी को अपने साले के बारे में बता रहे थे।  कासिम चचा के साले ने बीते इतवार को गुस्से में आकर फांसी लगा ली थी। मेरे वहां पहुंचते ही पीछे से बड़के दद्दा और ककुवा की जोड़ी भी आ गई। वो दोनों जन चीन की चालबाजी बतियाते हुए आ रहे थे। हम सब चबूतरे के चारों तरफ पड़ी कुर्सियों पर बैठ गए। लद्दाख की गलवन घाटी में शहीद हुए 20 वीर जवानों के सर्वोच्च बलिदान को नमन किया गया। फिर धूर्त चीन पर ही बतकही आगे बढ़ी। 

चतुरी चाचा बोले- मुझे दुःख इस बात है कि पड़ोसी बदले नहीं जा सकते हैं। वरना, चीन और पाकिस्तान जैसे राच्छस पड़ोसी को बदल दिया जाता। दोनों बेहद गन्दी और खतनाक सोच वाले देश हैं। ये दोनों ही पीठ में छुरा घोपने में निपुण हैं। इन दोनों देशों की लीडरशिप और मिलिट्री झूठ और चालबाजी के ट्रैक पर ही दौड़ती है। ये दोनों संसार में भारत के बढ़ते प्रभुत्व से बौखलाए हैं। ये दोनों देश भारत से लगातार छद्म युध्द लड़ रहे हैं। पाकिस्तान जहां पिछले कई दशक से सीमा पर गोलाबारी करने के साथ भारत में निरन्तर आतंकवादी भेज रहा है। वहीं, चीन बार-बार सीमा पर विवाद करता है। वह अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत का अहित करता है। साथ ही, वह पाकिस्तान व नेपाल के सत्ताधारी नेताओं/अधिकारियों को मोटी रकम का चढ़वा चढ़ाकर उन्हें अपनी मुट्ठी में किये है। अब तो नेपाल भी भारत को ऑंखें दिखा रहा है।

कासिम चचा बोले- चतुरी भाई आप इतना चिंतित न हो। भारत अब 1962 वाला भारत नहीं रहा। इतने वर्षों में बहुत कुछ बदल चुका है। अब भारत अपने दुश्मन की ईंट से ईंट बजा देगा। चीन की दगाबाज सेना ने हमारे 20 वीर सैनिकों को धोखे से शहीद किया है। परन्तु, हमारे वीरों ने अपना बलिदान देने के पहले अनेक चीनी सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया था। चीन अपनी बड़ी फौज और गोला-बारूद का बस भौकाल दिखाता है। वह सामने से युद्ध लड़ने से हमेशा कतराता है। धोखा देकर या फिर डर दिखाकर जमीन हथियाना ही चीन की फितरत है। ड्रैगन मदद और मित्रता के नाम पर भी अन्य देशों का शोषण ही करता है। चीन एक तरह से इस क्षेत्र का भूमाफिया है। इसकी विस्तारवादी कुनीति पर अपना भारत ही लगाम लगा सकेगा।

इसी बीच चंदू बिटिया गिलोय का काढ़ा और गुनगुना नींबू पानी लेकर आ गयी। कोरोना काल में चंदू चबूतरे पर ट्रे रखकर तुरन्त घर चली जाती है। वह पिछले तीन महीने से प्रपंचियों से दूरी बनाए है। वह भी अन्य बच्चों की तरह बिना परीक्षा दिए कक्षा आठ में पहुंच गई। कोरोना महामारी के चलते पहले उसकी आनलाइन क्लास चलती रहीं, फिर समर कैंप हुआ। उसके बाद गर्मी की छुट्टियां हो गईं। किसी को नहीं मालूम है कि उसका स्कूल कब खुलेगा। हालांकि,  नई क्लास में नाम लिखवाने तथा कॉपी-किताब व ड्रेस इत्यादि सामग्री खरीदने के लिए स्कूल से फोन आ गया है।
      
काढ़ा पीने के बाद बड़के दद्दा ने कहा- बड़ी खुशी की बात यह है कि भारत चीन के लाख विरोध के बाद भी सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य चुन लिया गया। दुनिया के तकरीबन सवा सौ देशों ने भारत को वोट दिया। इसके अतिरिक्त विश्व के सबसे ताकतवर देशों के समूह जी-7 में भी भारत को शामिल करने के लिए अमेरिका जुटा हुआ है। अमेरिका, फ्रांस व इजराइल सहित अन्य देश भारत को अत्याधुनिक लड़ाकू जहाज, हेलीकॉप्टर व अन्य युद्धक साजो-सामान उपलब्ध करवा ही रहे हैं। गलवन घाटी में चीनी सेना की गन्दी हरकत को लेकर भी विश्व के तमाम देश भारत के पक्ष में खुलकर बोल रहे हैं। भारत ने अपनी कूटनीति से चीन को पूरी दुनिया से अलग-थलग कर दिया है।
    
मुंशीजी बोले- शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी ने सर्वदलीय बैठक की थी। प्रधानमंत्री ने उसमें बताया था कि चीन से कूटनीतिक स्तर पर दो टूक वार्ता हो चुकी है। चीन से कह दिया गया है कि भारत शांति चाहता है, किंतु सीमा पर कभी भी किसी की दादागिरी बर्दाश्त नहीं करेगा। वहीं, हमने भारतीय फौज को खुली छूट दे दी है। अब भारतीय सेना अपने स्तर से सीमा पर जवाबी कार्रवाई करती रहेगी। बैठक में सारे राजनीतिक दलों ने एक स्वर में कहा कि चीन को सबक सिखाया जाए। हम सब भारत सरकार और सेना के साथ खड़े हैं। दूसरी तरफ पूरे देश में चीन को लेकर भारी आक्रोश है। चीनी सामान का बहिष्कार शुरू हो गया है। केंद्र सरकार ने चीनी दूर संचार उपकरण पर रोक लगा दी है। भारतीय रेलवे ने भी करोड़ों रुपये का चीनी ठेका निरस्त कर दिया है। इसका सन्देश बहुत अच्छा जाएगा।
   
अभी तक चुप्पी मारे ककुवा बोले- यूह कहव केंद्र मा मोदी सरकार हय तौ बड़ा नीक होय रहा। जौ कहूँ कौनिव ढुलमुल सरकार होत तौ नरक होय जात। वह न कोराउना का सम्भार पावत अउ न चीन का। सरकार चीन कहिंया सबक सिखाव केरी ख़ातिन जुटी हय। अब हमहूँ पँचन का चाही कि चीनी सामानन ते मुक्ति पाई। हम सभे जौ चीन क्यार सामान खरीदब पूरी तिना बन्द कय देइ तौ चीन केरि कमर टूटि जाई। ससुरा हमहि ते कमाया रहा अउ हमहि ते लड़ि रहा। पूरी दुनियाक कोराउना जैसि महाब्याधि दिहिस। लाखन मनई बेमौत मरि गवा। आजव कोराउना ते अपने दयास मा लोग मरि रहय। याक लँग पूरा संसार कोराउना ते जूझ रहा। दूसरी लँग चीन जमीन अउ समंदर मा कब्जा कय रहा। चीन दुनिया भरमा अपनी सड़ी-गली, नकली चीजें बेचि रहा। सोचय वाली बाति यह हय कि चीनीन केरि आधिन आँखि खुलत हय। ई दुष्टन केरि जौ पूरी आंखि खुलतय तौ का का कय डरति?
  
इसी के साथ आज की पंचायत समाप्त हो गयी। सब लोग तुरंत अपने घर रवाना हो गए। क्योंकि, सबको विश्व योग दिवस पर अपने परिजनों के साथ योगाभ्यास करना था। मैं अगले रविवार को फिर चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे पर होने वाली बेबाक बतकही लेकर हाजिर रहूँगा। तब तक के लिए पँचव राम-राम!


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