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'तुम खुद ही खुद से बिछड़ गए'- दमनजीत कौर

Monday, June 15, 2020

/ by Editor

लेखिका - दमनजीत कौर
मेरठ-उत्तर प्रदेश

ऐसा क्या हुआ,
कि तन्हाईयों के दरवाजे इतने बड़ गये,
की तुम खुद ही खुद से बिछड गये ||

चमकता हुआ मासूम सा चेहरा,
दिल को छू जाने वाली वो प्यारी सी मुस्कराहट,
हुनर से भरा हुआ अभिनय,
दूसरो को प्रेरित करने वाला वो प्रोत्साहन, 
सब कुछ यादों के कुछ पन्ने बन कर रहे गये ||

ऐसा क्या हुआ,
तुम हमसे ऐसे नाराज हो गये,
की तुम्हारी एक झलक, 
सिर्फ याद बन कर रहे गयी ||

इतनी भीड में तुम अकेले कैसे रहे गये,
सभी के प्यारे, राज दुलारे,
तुम सबको छोड कर क्यू चले गये,
इस गुत्थी को तुम ऐसे उल्झा कर चले गये,
की सिर्फ यादो की दरोहर मे रहे गये ||


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  1. Not happy with Sushant. He has taken wrong step. What was the fault of his father?

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  2. By the way ur lines which u hv wrote are very emotional n heart touching.

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