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69000 शिक्षक भर्ती मामला :जालसाजी का मास्टरमाइंड स्कूल प्रबंधक व परीक्षा का टॉपर गिरफ्तार, एसटीएफ जांच करेगी

लखनऊ
प्रदेश में 69000 सहायक शिक्षक भर्ती में जालसाजी करने वाले गिरोह के सरगना स्कूल प्रबंधक केवल पटेल व परीक्षा के टॉपर धर्मेंद्र सरोज समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद मंगलवार को कोर्ट में पेश किया। जहां से सभी को जेल भेज दिया गया। इस मामले में अभी दुर्गेश कुमार व संदीप पटेल नाम के आरोपी फरार चल रहे हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। इससे पहले रविवार को इस गिरोह से जुड़े 5 जालसाजों को गिरफ्तार करके जेल भेजा जा चुका है।
पुलिस के मुताबिक, आठ से 10 लाख रुपए देकर अभ्यर्थी पास हुए हैं। वहीं, शासन ने इस मामले की जांच एसटीएफ को दी है। हालांकि, बसपा प्रमुख मायावती ने सीबीआई से जांच कराए जाने की मांग की है। वहीं, प्रियंका गांधी ने आज कई अभ्यर्थियों से बात की है। 
प्रबंधक ने स्कूल परिसर में गड्ढे में छिपाए थे 14 लाख रुपए
प्रयागराज पुलिस ने भदोही के कोइरौना थाना अंतर्गत बीरापुर के रुद्रपति दुबे, प्रतापगढ़ के मांधाता निवासी धर्मेंद्र सरोज, प्रयागराज के बहरिया निवासी सरगना केएल पटेल, नवाबगंज के रंजीत सरोज, जार्जटाउन के संतोष कुमार और राजापुर के ललित त्रिपाठी को इस मामले गिरफ्तार किया है। जिला पंचायत के पूर्व सदस्य एवं स्कूल प्रबंधक केएल पटेल के स्कूल परिसर में जमीन में गड्ढा खोदकर रखे गए 14 लाख रुपए व दूसरे आरोपितों के पास से साढ़े सात लाख रुपए, लैपटॉप, अंकपत्र समेत दूसरे दस्तावेज बरामद किए हैं।
गिरफ्तारी के लिए छापेमारी में जुटी है एसटीएफ व क्राइम ब्रांच
अभियुक्तों की डायरी में दर्ज जानकारी के आधार पर पुलिस ने अभ्यर्थी विनोद यादव व धर्मेंद्र से भी पूछताछ की थी। दोनों ने लिखित परीक्षा में पास होने के लिए क्रमश: आठ और 12 लाख रुपए देने की बात कबूल की है। पुलिस का कहना है कि विवेचना के दौरान दुर्गेश व संदीप पटेल का नाम प्रकाश में आया है। नामजद आरोपित रुद्रपति के भाई मायापति दुबे सहित कई की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। पुलिस के पास कई जिलों से शिकायतें आई हैं।
माना जा रहा है कि गिरोह का नेटवर्क कई जनपदों में फैला हुआ है। कई अभ्यर्थियों ने गिरोह की मदद से लिखित परीक्षा पास की है। एएसपी केवी अशोक ने बताया कि डायरी में दर्ज नाम व अनुक्रमांक नंबर के आधार पर कई अभ्यर्थियों के तलाश की जा रही है। दो को वांछित घोषित किया गया है। 
142 अंक पाकर टॉपर बना था धर्मेंद्र, मगर राष्ट्रपति का नाम मालूम नहीं 
धर्मेंद्र पटेल शिक्षक भर्ती का टॉपर था। वह प्रयागराज के सराय ममरेज का रहने वाला है। उसके कुल 150 में से 142 अंक है, लेकिन पुलिस की पूछताछ में वह भारत के राष्ट्रपति का नाम नहीं बता पाया। यह बात दीगर है कि रिजल्ट घोषित होने से पहले ही उसने अपने जानने-पहचानने वालों एवं नाते-रिश्तेदारों से यह कहना शुरू कर दिया था कि देखना रिजल्ट में वह टॉपर लिस्ट में शामिल रहेगा। एएसपी अशोक व्यंकटेश ने बताया कि भर्ती परीक्षा में पास हुए 3 अभ्यर्थियों धर्मेंद्र, विनोद व एक अन्य को गिरफ्तार किया गया है। धर्मेंद्र से जब पूछताछ की गई तो वह राष्ट्रपति का नाम तक नहीं बता पाया। 
ऐसे में पकड़ में आया मामला
प्रयागराज के एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज ने बताया था कि, प्रतापगढ़ निवासी राहुल सिंह ने सोरांव थाने में पूर्व जिला पंचायत सदस्य डॉक्टर कृष्ण लाल पटेल समेत आठ लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया था। आरोप लगाया कि, 69000 सहायक शिक्षक भर्ती में आरोपियों ने परीक्षा पास कराने के लिए 7.50 लाख कैश दिया था। एक जून को जब रिजल्ट आया तो उसमें राहुल का नाम नहीं था। इसके बाद उसने पुलिस से मदद मांगी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर सात आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की थी। इसके बाद मामले का खुलासा हुआ। 
मायावती ने ट्वीट कर सीबीआई जांच की मांग की

उत्तर प्रदेश में 69 हजार शिक्षकों की भर्ती में बड़े पैमाने पर गड़गड़ी, धांधली व भ्रष्टाचार आदि के सम्बंध में रोज नए-नए खुलासे व तथ्यों के उजागर होने के कारण अब यह मामला काफी गंभीर हो गया है। जनता काफी आशंकित है। ऐसे में इसकी सी.बी.आई. जाँच होनी चाहिए, बी.एस.पी. की यह माँग है।
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