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अयोध्या: राम मंदिर के भूमि पूजन का कार्यक्रम टला, चंपत राय ने कहा- देश की सुरक्षा हम सबके लिए सर्वोपरि

Thursday, June 18, 2020

/ by Editor
अयोध्या
गलवान घाटी में हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन के बीच उपजे तनाव को देखते हुए अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर निर्माण के लिए होने वाले भूमि पूजन कार्यक्रम को टाल दिया गया है। यह कार्यक्रम दो जुलाई को सुबह 8 से 10 बजे तक के बीच होना था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए इस आयोजन का हिस्सा बनने वाले थे। गुरुवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया- देश की सुरक्षा हम सबके लिए सर्वोपरि है। निर्माण काल की तारीख देशकाल की परिस्थिति को देखकर घोषित होगी।   
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय समेत अन्य पदाधिकारियों ने शहीद वीर सपूतों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने ने कहा भारत-चीन सीमा की परिस्थिति गंभीर है। देश की सुरक्षा हम सभी के लिए सबसे पहले है। मंदिर निर्माण कार्य को शुरू करने का यह समय नहीं है। देश की परिस्थितियों को देखकर आने वाले समय में नई तारीख का ऐलान होगा। इसकी जानकारी वेबसाइट पर अपडेट की जाएगी। 
अभी तक यह था प्रस्तावित कार्यक्रम
तीन जून को रामलला के दर्शन के लिए आए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर कार्यवाह भैयाजी जोशी राम जन्मभूमि की पवित्र मिट्टी लेकर गए थे। उन्होंने वह मिट्टी प्रधानमंत्री तक पहुंचाई थी। कहा जा रहा था कि, प्रधानमंत्री दो जुलाई को निर्धारित मुहुर्त में परिसर की मिट्टी का पूजन करेंगे और अपने प्रतिनिधि व मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र के हाथों अयोध्या भेजेंगे। यहां भूमि पूजन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, ट्रस्ट के पदाधिकारी व संत-महंत शामिल होंगे। दो जुलाई से ही मंदिर के लिए नींव खुदाई का काम भी शुरू होना था। मंदिर निर्माण का काम लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) के माध्यम से होना है। 
जमीन को समतल किया गया
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर श्रीराम तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन हुआ है। 25 मार्च को श्रीरामलला को अस्थाई मंदिर में विराजित किया गया था। 67 एकड़ जमीन को समतल किया जा चुका है। इस दौरान ब्लैक टच स्टोन के सात खंभे, छह रेडसैंड स्टोन के खंभे, पांच फुट के नक्काशीनुमा शिवलिंग और मेहराब के पत्थर, देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियां, पुष्प कलश और नक्काशीदार खंभों के अवशेष मिले थे। पुरातत्वविद केके मोहम्मद ने इन अवशेषों को 8वीं शताब्दी का बताया था। मंदिर निर्माण के लिए पत्थरों की सफाई भी शुरू हो चुकी है।

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