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घनी आबादी में बेखौफ चल रहीं लगभग 350 फैक्टरियां

Sunday, June 21, 2020

/ by Editor
सुरेश कश्यप (इंडेविन टाइम्स)
लखनऊ। 

राजधानी के चिनहट में उतरधौना स्थित गत शुक्रवार को एक केमिकल फैक्टरी में हुये विस्फोट से भी प्रशासन की नींद नहीं खुलती दिख रही। इस प्रकरण में मौके पर जांच के लिये पहुंची एडीएम टीजी की टीम ने बताया कि यह विस्फोट दो तरफ के केमिकल आपस में मिलाने के बाद हुआ।

चिनहट क्षेत्र में एक वर्ष के भीतर यह दूसरा हादसा है। उतरधौना के ही पास पिछले वर्ष 31 अगस्त को इडियन पेस्टिसाइड फैक्टरी से जहरीला रसायन बिना फिल्टर हुये नालियों में बहा दिया गया था। इससे तिवारीपुरवा के ग्रामीणों की 3 दर्जन से अधिक भैंसे मर गयीं थीं। मवेशियों के बचाने के चक्कर में नाले में उतरे दर्जन भर लोगों के शरीर पर फफोले पड़ गये। इस घटना में फैक्टरी सील करने के साथ ही मालिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। उसी बीच तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट ने आबादी के भीतर स्थित फैक्टरियों को शहर से दूर करने का निर्देश दिया था।

राजधानी में घनी आबादी में धड़ल्ले से चल रहीं फैक्टरियां जानमाल के लिये मुसीबत बनी है। इन फैक्टरियों में सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी हैं। जिसके चलते छोटा सा हादसा भी बड़ा रूप ले सकता है।
रिहायशी इलाकों में आग लगने के कुछ बड़े मामलों पर एक नजर-

05 सितम्बर 2017 को बाजारखाला के ऐशबाग वॉटर वर्क्स रोड पर धर्मवीर गुलाटी की पंजाब टिंबर स्टोर के नाम से प्लाईवुड फैक्टरी में आग से भारी नुकसान।

03 सितंबर 2017 को कैसरबाग के हीवेट रोड सुन्दरबाग स्थित तीन मंजिला भवन में प्लास्टिक फैक्टरी में आग से हड़कंप।

28 अगस्त 2019 को पारा के पूर्वीदीनखेड़ा में तीन बीघा क्षेत्र में फैली राजा प्लाईवुड फैक्टरी में आग से लाखों की क्षति। दो दिन लगे थे आग बुझाने में।

16 नवम्बर 2018 को मड़ियांव के पलटन छावनी में गौरी फूड्स फैक्टरी में लगी आग। 


15 मार्च 2020 काकोरी के अंधे की चौकी में पेपर गिलास व प्लेट बनाने वाली बाला जी फैक्टरी में आग से लाखों का नुकसान।

04 जुलाई 2019 को तालकटोरा इंडस्ट्रियल एरिया में विनायक फाइबर बोर्ड इंडस्ट्री में आग की लपटों ने मचाया था कहर। 

लाख दावों के बाद भी रिहायशी इलाकों में बेखौफ चल रही छोटी-बड़ी साढ़े 300 फैक्टरियां कभी भी जानलेवा हादसे का कारण बन सकती हैं। हर हादसे के बाद पुलिस व प्रशासन ऐसी फैक्टरियों का संचालन बन्द करा आबादी वाले इलाके के बाहर कराने का दावा तो करता है लेकिन बाद में कार्यवाही की जिम्मेवारी प्रशासन, पुलिस, फायर, नगरनिगम, पर्यावरण व श्रम विभाग एक दूसर पर डालकर चुप्पी साध कर बैठ जाते हैं। जिससे ये फैक्टरियां यू ही चलती रहती हैं और आदसे का शिकार होती रहती हैं।

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