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सरकार को चूना लगाने का एक और कारनामा

Monday, June 22, 2020

/ by Editor

सुरेश कश्यप (इंडेविन टाइम्स)
लखनऊ। 

महराजगंज में सड़क मंजूर प्रोजेक्ट में रकम हड़पने का कारनामा परत-दर-परत खुलता जा रहा है। हवा में ही 27 करोड़ की सड़क मंजूर करवाने का मामला प्रकाश में आया। केन्द्र सरकार द्वारा स्वीकृत इस प्रोजेक्ट में रकम हड़पने के लिये डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) में सड़क की लंबाई के बाद सड़क की भूमि की चौड़ाई भी गलत दर्ज की गयी है। पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरां ने 16 मीटर चौड़ी राजमार्ग की भूमि को 30 मीटर दिखाकर डीपीआर मंजूर करा ली थी।

खुलासा होने पर आनन-फानन में गत शनिवार को अधिकारियों ने शनिवार की छुट्टी के बावजूद पीडब्ल्यूडी मुख्यालय का सम्बन्धित कार्यालय खुलवाया। दोषी तत्कालीन एक्सईएन के विरूद्ध आरोपपत्र फाइनल करके शासन को भेज दिया। 

क्या है पूरा मामला- वर्ष 2018 के सिसवा बाबू सेक्शन के 21.12 किमी लम्बी सड़क निर्माण के लिये केन्द्र को डीपीआर भेजी गयी थी। केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इसके लिये 185.18 करोड़ रूपये की स्वीकृति जारी कर दी, जबकि सड़क के इस भाग की लम्बाई 18.39 कीमी ही है। इस प्रकार 2.73 किमी सड़क अधिक दिखाकर इस भाग की लागत 26.9432 कारोड़ हड़पने के लिये यह पूरा खेल रचा गया। यही नहीं, डीपीआर में सड़क की भूमि की चौड़ाई (आरओडब्ल्यू) भी गलत दिखाई गयी। सड़क के चैनेज 501.850 पर स्थित सक्सेना चौराहे पर राजमार्ग की भूमि मात्र 16 मीटर ही उपलब्ध है।

एक और खेल- इस भूमि पर भी दूसरे व्यक्तियों का कब्जा था। जिन्हें राष्ट्रीय राजमार्ग की नीति के तहत मूल्यांकन करते हुये मुआवजा दिये जाने की व्यवस्था है। किन्तु, राजमार्ग के गैर स्वामित्व वाली भूमि को भी आरओडब्ल्यू में दिखाया गया। डीपीआर में राजमार्ग के स्वामित्व के बाहर की भूमि के लिये मुआवजा भुगतान का कोई प्रावधान नहीं किया गया। इससे कानून-व्यवस्था की स्थिति का संकट भी पैदा हुआ।

एक और कारनामा- पीडब्ल्यूडी की राजमार्ग विंग में हवा में सड़क मंजूर कराने का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ कि एक और बड़ा मामला सामने आ गया। तीन अलग-अलग ऐसे राजमार्ग की मरम्मत और नवीनीकरण के टेंडर आमंत्रित कर लिये गये, जिसके काम स्वीकृत ही नहीं थे। अब इन मामलों में तत्कालीन 2 अधीक्षण अभियंता और एक अधिशासी अभियंता को जार्जशीट देने की तैयारी चल रही है। ये प्रकरण अप्रैल 2017 से फरवरी 2018 के बीच के हैं। पीडब्ल्यूडी के रिकॉर्ड के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग वृत लखनऊ के अन्तर्गत फरवरी 2018 में एनएच-727 (कुशीनगर से छपरा) के नवीनीकरण के लिये 14,38,564 रूपये की लागत से निविदा सूचनायें जारी करायी गयीं। जबकि यह काम सक्षत स्तर से स्वीकृत नहीं था। 

इस सड़क के कीमी. 111-130,400 और किमी. 152.600-154 के बची नवीनीकरण का यह कार्य होना बताया गया। इसी प्रकार से एनएच-29-ई पर पैच वर्क के लिये 6,38,808 रूपये और एनएच 28-बी पर पैच वर्क के लिये 7,67,331 रूपये का विज्ञापन दिया गया। कुला मिलाकर इन गैर अनुमोदित और गैर स्वीकृत कार्यों के विज्ञापन पर 28,44,703 रूपये खर्च किये गये। इस प्रकार से इंजीनियरों ने सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया। इन प्रकरणों में 2 पूर्व अधीक्षण अभियंता व एक अधिशासी अभियन्ता को आरोप पत्र देने की तैयारी चल रही है। वर्तमान में दोनों अधीक्षण अभियंता सेवानिवृत्त हैं।

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