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कोविड- 19 लॉकडाउन के बीच ऐड एट एक्शन ने देश भर में 3000 प्रवासी परिवारों को घर लौटने में मदद की

Friday, June 19, 2020

/ by Editor
कानपुर।

वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण सबसे अधिक नुकसान प्रवासी श्रमिकों को उठाना पड़ रहा है। लाखों प्रवासी श्रमिक अपनी नौकरी गंवा चुके हैं और वापस घर लौटने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हालांकि, कुछ संस्थाएं इस मुश्किल वक़्त में उनकी सहायता के लिए आगे भी आ रही हैं। इन्हीं में से एक है गैर-लाभकारी संस्था ऐड एट एक्शन, जिसने देश भर में 3000 से अधिक प्रवासी परिवारों को घर लौटने में मदद की है। इसी कड़ी में वडोदरा में फंसे फर्रुखाबाद व कानपुर के 37 प्रवासी श्रमिकों को भी ऐड एट एक्शन द्वारा घर तक पहुंचाया गया है। संस्था को इन श्रमिकों की परेशानी के बारे में फेसबुक वीडियो के जरिए जानकारी मिली थी। 

दरअसल, ऐड एट एक्शन की कर्मचारी शिखा रल्हन ने एक फेसबुक पोस्ट में देखा कि मनेजा (वडोदरा) में 37 प्रवासी मजदूर फंसे हैं और मदद मांग रहे थे। इसके बाद वह अपनी टीम के साथ मनेजा पहुंच गई जहां उन्होंने पाया कि प्रवासी श्रमिकों में 21 बच्चे, 9 पुरुष और 7 महिलाएं हैं और इनमें से एक गर्भवती भी हैं। वे सभी यह सूचना मिलने पर पाटन से वडोदरा पहुंचे थे कि उन्हें यहां  से उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद के लिए ट्रेन मिल जाएगी। लेकिन पैसे के अभाव में वे भोजन और पानी के बिना फंस गए थे। यही नहीं, उनमें से काइयों के पास पहचान का प्रमाण भी नहीं था। इसके बाद, श्रमिकों को घर वापस भेजने के लिए ऐड एट एक्शन टीम ने दोनों राज्यों की सरकार और स्थानीय पुलिस से संपर्क किया लेकिन प्रवासी श्रमिकों के पास पैसा और पहचान पत्र नहीं होने के कारण प्रयास व्यर्थ गया।

ऐड एट एक्शन आई-लीड एक्जीक्यूटिव शिखा रल्हन ने बताया कि, “चूंकि प्रवासी मजदूरों के पास पैसे नहीं थे, इसलिए सबसे महत्वपूर्ण था उनके लिए आर्थिक मदद जुटाना। हमने विभिन्न प्रयासों से उन्हें घर भेजने का उपाय निकाला और वडोदरा और जयपुर में हमारी टीमों के साथ समन्वय किया।“

ऐड एट एक्शन ने उन्हें प्रवासी श्रमिकों के कल्याण के लिए काम करने वाली एक गैर-लाभकारी संस्था नालसर के माध्यम से पैसा जुटाने में मदद की और आई-लीड रिसोर्स सेंटर ने उनके लिए फरुखाबाद तक परिवहन की व्यवस्था की। जयपुर पहुंचने पर, जयपुर ऐड एट एक्शन टीम ने उनके लिए जलपान की व्यवस्था की। प्रवासी 8 जून की रात को अपने गृह नगर सफलतापूर्वक लौट आए। उन्हें उनके गांव में बने क्वारंटीन सेंटर में ठहराया गया है और वडोदरा की आई-लीड टीम उनके साथ नियमित संपर्क में है।

ऐड एट एक्शन के प्रयासों से घर लौटने सफल रहे प्रवासी श्रमिकों में से एक मालू शाह ने कहा कि, “हम घर लौटने में मदद करने के लिए ऐड एट एक्शन के बहुत आभारी हैं। लॉकडाउन के कारण हम यह उम्मीद छोड़ चुके थे की घर वापस पहुँच सकेंगे, लेकिन ऐड एट एक्शन ने हमें आर्थिक और भावनात्मक दोनों तरह से भरपूर समर्थन दिया।”

इस पहल को लेकर ऐड एट एक्शन इंटरनेशनल के लाइवलीहुड एजुकेशन के प्रोग्राम डायरेक्टर (साउथ एशिया) डॉ. ऐश्वर्य महाजन ने कहा कि, “प्रवासियों की सहायता के लिए हमने अपने 19 आई-लीड केंद्रों को सूचना और रिसोर्स सेंटर में तब्दील कर दिया है। जैसे ही हमें कहीं से भी प्रवासियों के फंसे होने की सूचना मिलती है हम उन्हें घर पहुंचाने के प्रयास में जुट जाते हैं। इस पहल के तहत अभी तक हम 3000 से अधिक प्रवासियों को उनके घरों तक सुरक्षित पहुंचा चुके हैं।” 

ऐड एट एक्शन के बारे में 
एड एट एक्शन एक गैर-लाभकारी संस्था है जो लाइवलीहुड एजुकेशन के क्षेत्र में काम कर रही है। इनिशिएटिव फॉर लाइवलीहुड एजुकेशन एंड डेवलपमेंट (आई-लीड) नामक इसका प्रमुख कार्यक्रम अल्पकालिक प्रशिक्षण के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों व कम शैक्षिक योग्यता वाले युवाओं के बीच लाइवलीहुड एजुकेशन को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। वर्तमान में, भारत, नेपाल, श्रीलंका, भूटान और फिलीपींस में इसके 46 केंद्र हैं। आई-लीड ने अब तक दुनिया भर में 2,42,000 युवाओं को प्रशिक्षित किया है, जिसमें 46% महिलाएं शामिल हैं और 76% संगठित क्षेत्र में काम कर रहे हैं। यह संस्था उद्यमिता और रोजगार क्षमता आकलन (ईईपीए), अधिकारिता के लिए गॉसिप सर्किल (जीसीई) और एंटरप्राइज डेवलपमेंट मॉडल जैसे अद्वितीय नवाचार कार्यक्रम को नई ऊंचाइयों प्रदान कर रही है

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