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तालाबों पर दोबारा कब्जा कर रहे बेखौफ भूमाफिया

Friday, June 19, 2020

/ by Editor

मंजू सिंह -विशेष संवाददाता (इंडेविन टाइम्स)
लखनऊ। 

राजधानी लखनऊ में पुलिस-प्रशासन की उदासीनता और घोर लापरवाही का नतीजा है कि यहां के तालाबों, पोखरों व झीलों पर अवैध कब्जे किये जा रहे हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि मानसून से पहले हम कब्जे हटवा कर इनका पुराना स्वरूप बरकरार रखेंगे। प्रशासन के लिये यह अभियान एक बड़ी चुनौती है। पांचों तहसीलों में 2,500 तालाब व पोखरों को 200 हैक्टेयर जमीन पर अवैध कब्जे हैं। 

मिली जानकारी के अनुसार राजधानी की पाचों तहसीलों में 10 वर्ष पहले 13,00 से अधिक तालाब, झील व पोखर राजस्व अभिलेख में दर्ज थे। किन्तु अवैध कब्जे के चलते 3000 से अधिक तालाबों का अस्तित्व ही खत्म हो गया है। अब 300 हेक्टेयर जमीन पर 10,000 से अधिक झील पोखर व तालाब बचे हैं। इनमें 2500 से अधिक पर अवैध कब्जे इस वर्ष के प्रारम्भ में पांचों तहसील क्षेत्रों में सर्वे के बाद तैयार रिपोर्ट में चिन्हित किये गये। प्रशासन ने इनसे कब्जा हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके साथ ही ग्राम समाज की ऐसी जमीन को भी अब राजस्व अभिलेख के आधार पर चिन्हित किया जा रहा है। जहां पहले तालाब व पोखर दर्ज थे। 
इसी आधार पर उपजिलाधिकारी के नेतृत्व में राजस्व कर्मियों की टीमें कार्यवाही कर रही हैं। पूर्व ग्राम प्रधान हरिहर नाथ चौहान का कहना है कि पुलिस-प्रशासन की उदासीनता और राजनेताओं व भूमाफियाओं की सांठगांठ से बीते 10 वषों में 3800 से अधिक तालाब व पोखर वजूद खोकर शहरीकरण की भेंट चढ चुके हैं। तालाबों को पाटकर कालोनियां बसा दी गयी हैं।

तहसील स्तर पर तैयार रिपोर्ट से साफ है कि सदर तहसील क्षेत्र में तालाब, झील व पोखर की जमीन के बतौर चिन्हित 5965 स्थलों में से 2463 को पाट कर आवासीय उपयोग में लाया गया। सरकारी जमीन व तालाबों पर अवैध कब्जे में सदर के बाद बीकेटी और मोहनलालगंज तहसील आती है। सदर तहसील में 1105.264 हेक्टेयर और बीकेटी में सबसे अधिक 709,594 हेक्टेयर सरकारी जमीनों और तालाबों पर कब्जे हो चुके हैं। मलिहाबाद, मोहनलालगंज व सरोजनी नगर में 182.104 हेक्टेयर सरकारी जमीन पर कब्जे हैं। 

तालाबों को पाटने व अवैध कब्जा कर आवासीय उपयोग में लाने से राजधानी में शहर के साथ गांवों में भी लगातार भूगर्भ जलस्तर तेजी से गिर रहा है। इससे कई नये क्षेत्रों के डार्क जोन बनने का खतरा मंडरा रहा है। राज्य भूजल विभाग ने प्रशासन को दी रिपोर्ट में बताया कि गत 7 वर्ष में भूगर्भ जलस्तर लगभग 12.94 मीटर तक नीचे खिसका है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जल्द ही ठोस प्रयास न हुये तो आने वाले समय मे शहरी व ग्रामीण क्षेत्र से कई नये इलाके डार्क जोन में चले जायेगे और भीषण पेयजल संकट का सामना करना पड़ सकता है। 

सरोजनी नगर तहसील प्रशासन ने गत गुरूवार को तालाब में दर्ज लगभग साढ़े 4 बीघा जमीन से अवैध कब्जा हटाया। इसकी कीमत लगभग सवा करोड़ बतायी गयी है। उपजिलाधिकारी प्रफुल्ल कुमार त्रिपाठी के अनुसार इलाके के सदरौना स्थित गाटा संख्या 672 व 673, रकबा 1.193 हेक्टेयर ( लगभग साढ़े 4 बीघा) जमीन राजस्व अभिलेखों में तालाब के रूप में दर्ज है। इस जमीन पर प्लाटिंग कर दीवार भी बना ली गयी है। गुरूवार को जेसीबी मशीन से दीवार ढहाकर जमीन को कब्जा मुक्त करा लिया। 

तेलीबाग तें खसरा संख्या 57, 58 पर 12 बीघे से भी अधिक का तालाब था। इसमें प्लाटिंग कर अधिकांश हिस्सा बेंच दिया। अब तालाब का बहुत छोटा हिस्सा बचा है। इसे भी भूमाफिया पाटने में लगे हुये हैं। खरिका वार्ड की सभासद पूनम मिश्रा ने नगर निगम में शिकायत की। इसके बाद गत सोमवार को फीते से तालाब की पैमाइश के बाद गुरूवार को इलेक्ट्रोनिक टोटल मशील से पैमाइश शुरू की गयी। उपजिलाधिकारी सरोजनी नगर ने बताया कि दोनों तरफ से पैमाइश के बाद संयुक्त रिपोर्ट नगर आयुक्त को दी जायेगी। उनके माध्यम से कमिश्नर को रिपोर्ट भेजी जायेगी। 

अवैध कब्जे की चपेट में आये तालाबों का पुराना वजूद लौटाने को मनरेगा के तहत इनकी खुदाई की जा रही है, किन्तु भूमाफिया इन पर दोबारा कब्जा करने से भी नहीं हिचकिचा रहे। पांचों तहसील की पड़ताड़ के बाद यह बात सामने आयी कि जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते भूमाफिया बखौफ हो गये हैं। 

सरोजनीनगर- मनरेगा के तहत तालाबों की खुदवाई व नये तालाब बनाने पर लाखों खर्च हो रहे है। किन्तु निगरानी में लापरवाही के चलते तालाबों को दोबारा पाटकर निर्माण कार्य चल रहा है। बंथरा में आधा दर्जन से अधिक तालाबों को पाटकर प्रॉपर्टी डीलरों ने प्लाटिंग कर दी है। यहां ढोडइया तालाब स्वरूप खो चुका है। तहसीलदार उमेश सिंह भी 44 से अधिक तालाबों पर कब्जे की बात स्वीकार कर रहे हैं। 

बीकेटी तहसील- बीकेटी के देवरी रूखारा झील की 150 बीघा जमीन पर कब्जा कर कई लोग खेती कर रहे हैं। एक दशक में 3 बार कब्जा हटाया जा चुका है, लेकिन लोग दोबारा कब्जा कर लेते हैं। डिगोई गांव में 2 बीघे के तालाब की दो वर्ष पहले कुछ हिस्से में खुदाई हुई थी, किन्तु तालाब की जमीन पर फिर कब्जे किये जा चुके हैं। तहसील में 500 सरकारी तालाबों में से 200 पर कब्जे हैं। तहसीलदार राकेश पाठक ने बताया कि तालाबों से कब्जे हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है।

काकोरी सदर- मनरेगा में लाखों की लागत से तैयार आदर्श तालाबों में झाड़ियों व घास उगी है। तालाब पूरी तरह से अवैध कब्जे के चपेट में हैं। फतेहगंज में बना तालाब उजाड़ हो गया है। घास व झाड़ियां उगी हैं। रैंप टूट गया है। लाल नगर हरदोईया, नरौना का तालाब खनन माफिया के कब्जे में है। कुशमौरा में बना तालाब भी उजाड़ की स्थिति में है। सदर तहसीलदार शंभू शरण ने बतया कि तालाबों की जमीन कब्जामुक्त करायी जा रही है। बदहाल मनरेगा तालाबों को भी बरसात से पहले सफाई कराकर बरसाती जल संचयन के योग्य बनाया जा रहा है। 

मोहललालगंज तहसील- तालाबों से अतिक्रमण हटाने के बाद इनकी मनरेगा तहत खुदाई हो रही है। मऊ में एक बड़े तालाब पर कुछ लोगों ने अतिक्रमण कर रखा था, कार्यवाही के लिये जिलाधिकारी को रिपोर्ट भेजी गयी है। यहां बीते वर्ष 12 तालाबों की खुदाई की गयी थी। एडीओ पंचायत कमल किशोर शुक्ला ने बताया कि इस वर्ष 11 तालाबों की खुदाई का कार्य कराया जा रहा है। 

मलिहाबाद तहसील- यहां तालाबों पर अवैध कब्जे हैं। सुरगौला में किनारे ऊसर की जमीन पर स्थित तालाब को दो पूर्व प्रधानों ने तहसीलकर्मियों से सांठ-गांठ कर चेहतों को आवासीय पट्टे करा व्यवसायिक व आवासीय निर्माण करा डाला। गांव के चंदन शर्मा ने बताया कि तालाब पर कब्जा हो जाने के बाद ग्रामीणों के घरों में पानी निकलने की कोई व्यवस्था नहीं है। बागों की सींचाई के लिये बने दो दर्जन से अधिक तालाब भी पाठ दिये गये हैं। 

इस पूरे मामले पर जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश का कहना है- तालाबों से अवैध कब्जे हटाने की कार्यवाही कोरोना संक्रमण के बावजूद पांचों तहसीलों में चल रही है। अभियान के तहत बीते 10 दिनों में 76 करोड़ रूपये की 75.704 हेक्टेयर जमीन खाली कराकर आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही शुरू की गयी है। खाली हुयी लगभग 47 हेक्टेयर जमीन पर बरसात से पहलेही खुदाई कराकर तालाब का पुराना वजूद लौटाया जायेगा। जिससे कि बरसाती पानी के संचयन से भूगर्भ जलस्तर बेहतर बनाया जा सके।

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