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पर्यावरण और सेनेटरी पैड : डॉ निरुपमा वर्मा

Saturday, June 6, 2020

/ by Editor
डॉ निरुपमा वर्मा - एटा ( उत्तर प्रदेश)

अजीब लग रहा है न ये शीर्षक देख कर !! दर असल कल 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस था और 28 मई को था अंतरराष्ट्रीय माहवारी स्वच्छता दिवस । दोनों विषय आवश्यक और महत्वपूर्ण भी । पर्यावरण  दिवस पर सेनेटरी पैड का ज़िक्र आवश्यक लगा मुझे । जब अक्षय कुमार पैड मैन के नाम से फ़िल्म कर सकते तो मैं क्यों नहीं दे सकती जानकारी ?

हम जानते हैं सैनिटरी पैड ज्यादातर प्लास्टिक के बने होते हैं और इनमें सेल्यूलोज गम के साथ-साथ शोषक तत्व भी होते हैं, जो किसी तरल पदार्थ को जेल में बदल देते हैं।

इस तरह की चीजों से तैयार होने वाले सैनिटरी नैपकिन पर्यावरण के लिए बेहद हानिकारक होते हैं, क्योंकि इनमें उचित निपटान प्रणालियों की पर्याप्त कमी होती है। ऐसे में ये कई बार बहकर समंदर में चले जाते हैं और इनसे शहरी इलाकों में सीवर के जाम होने का भी खतरा बना रहता है। प्लास्टिक के साथ मिलकर बनाये जाने वाले पदार्थ से  तैयार सेनेटरी पैड महिलाओं को दाग-धब्बे से तो बचाता है लेकिन ज्यादा देर तक इसे लगाए रखने से कई तरह के बैक्टीरिया पैदा होने लगते हैं जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

 भारत में अभी भी सेनेटरी पैड को लेकर जागरूकता की कमी हैं। गांव में कुछ महिलाओं ने सेनेटरी पैड का इस्तेमाल शुरू तो किया है लेकिन वो इस बात को नहीं जानती कि ज्यादा देर तक सेनेटरी पैड का इस्तेमाल खतरनाक होता है।

अतः पर्यावरण और महिला स्वास्थय के लिए डिस्पोजेबल विकल्पों की ओर अधिक ध्यान रखना होगा। बायोडिग्रेडेबल पैड्स और ऑर्गेनिक टैम्पोन या कार्डबोर्ड एप्लिकेटर के साथ टैम्पोन इत्यादि इसमें शामिल हैं। बायोडिग्रेडेबल पैड जैव-प्लास्टिक और प्राकृतिक यौगिकों जैसे कपास, बनाना या केले से प्राप्त फाइबर, बांस और इसी तरह के उत्पादों के समुचित अनुपात से बने होते हैं। इनमें भी तरल को सोखने की बेहतर क्षमता होती है और इन्हें खाद के गड्ढे में भी डाला जा सकता है। इनमें मौजूद बायो-प्लास्टिक की मात्रा के आधार पर ये कुछ महीनों से लेकर सालों में खाद में बदल जाते हैं।

भारत में बायोडिग्रेडेबल पैड की बात करें तो अभी यह बहुत दूर की कौड़ी लगती है। सरकार की तरफ से भी इस ओर कोई विशेष पहल नहीं की जाती है और प्राइवेट कम्पनियों द्वार फायदा कमाने के चक्कर में पर्यावरण को नुकसान पहुचाने वाले तथा महिलाओं को कई तरह के रोग देने वाले प्लास्टिक सेनेटरी पैड का ही उत्पादन किया जा रहा है।

मैं बाजार में आई नई चीज यानि कि Menstrual Cup के बारे में जानकारी दे रही हूँ ।

Sanitary Pads की तरह इसमें किसी तरह का केमिकल भी इस्तेमाल नहीं होता और ना ही किसी तरह से कॉटन का इस्तेमाल. इस कारण इस ईको-फ्रेंडली Menstrual Cup को dispose off करना भी आसान है. इसकी वजह से किसी भी तरह के संक्रमण का कोई खतरा नहीं होता. एक reusable Menstrual Cup कम से कम 1 साल तक इस्तेमाल किया जा सकता है। 

Menstrual Cup इस्तेमाल में ज्यादा सुरक्षित होने के साथ-साथ पैड्स के मुकाबले बेहद सस्ता है. Menstrual Cup ऑफिस जाने वाली या कहिए कामकाजी महिलाओं को रख-रखाव जैसी समस्याओं से भी निजात दिलवाता है. एक तो यह फिर से इस्तेमाल हो जाता है और दूसरे खुद के लिए पर्स में अतिरिक्त जगह भी नहीं मांगता. ये आपके vagina में रक्त स्राव के विरूद्ध इस तरह से फिट हो जाता है कि आपके बाहरी कपड़ों या अन्तः वस्त्र पर दाग की कोई सम्भावना नहीं होती। 

Sanitary Pads की तरह इसमें किसी तरह का केमिकल भी इस्तेमाल नहीं होता और ना ही किसी तरह से कॉटन का इस्तेमाल। इस कारण इस ईको-फ्रेंडली Menstrual Cup को dispose off करना भी आसान है। इसकी वजह से किसी भी तरह के संक्रमण का कोई खतरा नहीं होता। एक reusable Menstrual Cup कम से कम 1 साल तक इस्तेमाल किया जा सकता है।

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