Responsive Ad Slot

देश

national

'किसी की पीड़ा को देखकर' -पूजा खत्री

Saturday, June 20, 2020

/ by Editor
                                                     लेखिका - पूजा खत्री ( लखनऊ )

नहीं दे पाती हूं शब्द 
अपने ख्यालों को जब मैं                     
विचलित होती हूँ 
किसी की पीड़ा को देख कर
भीग जाती हूँ तब
दिल के उमडते
तमाम सैलाब में 
और फिर आंखों की नमी 
को सहेजती हूँ
वेदना क्यूं मुझे 
विचलित करती है पराई भी
जब कि नही हूं मैं किसी की रहबर
फिर भी सोचती हूँ
द्रवित होती हूं और फिर 
डूब जाती हूं किसी
गहरी वेदना में 
जब पाती हूं किसी को 
भूखा बिलखते तमाम...
परेशानियाें से मन द्रवित हो जाता है
खुद को पाती हूं 
उसकी जगह और फिर उसी 
पीडा से मैं खुद गुजरती हूं ...
तब नही छिटक पाती 
उन ख्यालों को कि नहीं 
 मैं वो नही हूं 

तब याद आता है
मुझे मेरा इन्सान होना
हाँ मेरा जिंदा होना कि 
हाँ सच है ये 
नही दे पाती हूं शबद 
अपने खयालो को जब मैं विचलित होती हूँ 
किसी की पीड़ा को देख कर...


No comments

Post a Comment

Don't Miss
© all rights reserved
Managed By-Indevin Infotech-Leading IT Company