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'हर आहट में लगता है तुम हो'-शिखा अस्तित्व

                                                      शिखा अस्तित्व, गोरखपुर

हर आहट में लगता है कि तुम हो,
पर तुम तो किसी और कि राह की मंजिल हो,
हर एहसास में लगता है कि तुम हो,
पर तुम तो किसी और दिल की धड़कन हो,
मंजिल और धड़कन भले किसी और के हो पर मेरा वजूद ही तुम हो तुम हो तुम हो।
हर बारिश में लगता है कि तुम हो,
पर तुम तो किसी और सीप के मोती हो,
हर तारो की रौशनी में लगता है कि तुम हो,
पर तुम तो किसी और का चांद हो,
मोती और चांद भले किसी और के हो पर मेरा वजूद ही तुम हो तुम हो तुम हो।
हर हम में लगता है कि तुम हो,
पर तुम तो किसी और के हम में गुम हो,
हर सांझ में लगता है कि तुम हो,
पर तुम तो किसी और के रात का चिराग हो,
तुम और चिराग भले ही किसी और के हो पर मेरा वजूद ही तुम हो तुम हो तुम हो 

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