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'इन प्राणों के अधिपति'-डॉ. लक्ष्मी चौहान

Saturday, July 4, 2020

/ by Editor
                                               लेखिका - डॉ. लक्ष्मी चौहान ( इंदौर )
हे ! पीताम्बर धारी ,
मेरी रूह के रंगरेज़ !
सारा जग चाहता है ..............
तुम्हारा दर्शन 
चिंतन 
स्मरण 
और 
जीवन का तुमसे मार्ग !
और इस बावरीं को 
चाहते हो !
स्वयं आप ।
स्नेह करते हो !
आसक्त हो ! तो ,
हे ! योगेश्वर
भला कौन तुम्हारी 
योगिनी को 
छीन सकता है 
तुमसे 
मेरे आलौकित 
प्रियतम !
इन प्राणों के अधिपति !
तुम्हारी अनुगामिनी ।


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