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मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स व हेल्थ इन्फोर्मेटिक्स में सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस मेडटेक का लखनऊ में होगा सॉफ्ट लांच

Wednesday, August 12, 2020

/ by Dr Pradeep Dwivedi

पांच साल की अवधि में 50 स्टार्ट-अप को पोषित करेगा सीओई।

लखनऊ। 

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)डमपजल्द्ध की स्वायत्त संस्था सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) 14 अगस्त 2020 को मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स व हेल्थ इन्फोर्मेटिक्स में एक सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस मेडटेक का सॉफ्ट लांच और एक ओपन चैलेंज प्रोग्राम शुरू करने जा रहा है। संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसजीपीजीआई), लखनऊए डिपार्टमेंट ऑफ आईटी एंड इलेक्ट्रॉनिक्स (उत्तर प्रदेश सरकार)एसोसिएशन ऑफ मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री (एआईएमईडी) व आंध्र प्रदेश मेडटेक जोन ;(MeitY) के सहयोग से सटीपीआई व डमपजल् द्वारा लखनऊ में मेडटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) की स्थापना की जा रही है।

'मेडटेक सीओई' और 'ओपन चैलेंज प्रोग्राम' का डिजिटली सॉफ्ट-लांच, MeitY भारत सरकार की विशेष सचिव और वित्तीय सलाहकार सुश्री ज्योति अरोड़ा और एसटीआई के महानिदेशक डॉ० ओंकार राय की अगुवाई में किया जाएगा। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री आलोक कुमार,  नैसकॉम के पूर्व चेयरमैन, इंडियन एंजल नेटवर्क के फाउंडर व मेडटेक के चीफ मेंटर पदमश्री डॉ०  सौरभ श्रीवास्तव, एएमटीजेड के सीईओ  श्री जितेन्द्र शर्मा, एसजीपीजीआई-लखनऊ के निदेशक श्री आरके धीमन, एआईएमईडी के फोरम कोर्डिनेटर श्री राजीव नाथए एसटीपीआई नोएडा के निदेशक श्री रजनीश अग्रवाल और श्री एसटीपीआई मुख्यालय के निदेशक सुबोध सचान भी उपस्थित रहेंगे।

सी.ओ.ई का मुख्य उद्देश्य त्वरित व निरंतर विकास के लिए लाइफ साइंस और हेल्थकेयर इंडस्ट्री को प्रोत्साहन देना है। ताकि नए व्यावसायिक अवसरों और बाजारों पर पकड़ बना कर को-क्रिएशन प्रोग्राम के माध्यम से वास्तविक दुनिया की चुनौतियों के लिए समाधान तैयार हो सके। 22 करोड़ रुपये (22 मिलियन) के अनुमानित बजट के साथ, सी.ओ.ई पांच साल की अवधि में 50 स्टार्टअप का पोषित करेगा। मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स और हेल्थ इंफॉर्मेटिक्स में रिसर्च व डेवेलपमेंट को प्रोत्साहित करेगा। साथ ही उद्यमी पारिस्थितिकी तंत्र को सुविधाजनक बनाएगा ताकि सस्ती और उच्च-गुणवत्ता वाले स्वदेशी चिकित्सा उत्पाद निर्माण वाले युवा उद्यमियों को प्रोत्साहन मिले। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

पी.जी.आई परिसर में 18,000 वर्ग फुट के बिल्ट-अप स्पेस में सीओई का निर्माण किया जाएगा। इस केंद्र को बायोस्टेटिक्स और हेल्थ इंफॉर्मेटिक्स के क्षेत्रों में पीजीआई की गहरी अनुसंधान क्षमताओं का भी लाभ मिलेगा। मेडिकल इनोवेशन के क्लिनिकल ट्रायल्स तक भी सहज पहुंच होगी। मजबूत बुनियादी ढांचा प्रदान करनेए उद्योग से जुड़ने के साथ-साथ सलाह और वित्तपोषण प्रदान करने में एसटीपीआई लखनऊ महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

एसटीपीआई के महानिदेशक डॉ० ओंकार राय ने कहा, 'लखनऊ में मेडटेक सी.ओ.ई उभरती हुई तकनीकों को सुदृढ करने के लिए एक मजबूत पारिस्थितिक तंत्र का निर्माण करेगा, मेडिकल इक्यूपमेंटध्इलेक्ट्रॉनिक्स और हेल्थकेयर इंफॉर्मेटिक्स के क्षेत्र में स्टार्टअप्स को पोषित करेगा एवं रिसर्च और डेवेलपमेंट को प्रोत्साहित करेगा। हेल्थकेयर के क्षेत्र में टेक्नोलॉजी का दायरा बढ़ाते हुए यह मेक इन इंडियाए स्टार्टअप इंडिया और डिजिटल इंडिया पहल में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।'

एसटीपीआई भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ;MeitY द्वारा वर्ष 1991 में स्थापित एक स्वायत्त संस्था है। इसका उद्देश्य देश से सॉफ्टवेयर निर्यात को प्रोत्साहित करना और बढ़ावा देना है। एसटीपीआई भारतीय आईटी उद्योग को सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करता हैए जिसमें डेटाकोम और इनक्यूबेशन सेवाएं शामिल हैं।

एसटीपीआई द्वारा उत्तर प्रदेश में रजिस्टर्ड यूनिट्स का निर्यात वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान 22725. 65 करोड़ रुपये का था। फिलहाल उत्तर प्रदेश में एसटीपीआई 1992 से कार्य कर रहा है। लखनऊ-कानपुर और प्रयागराज में एसटीपीआई के तीन सब-सेंटर्स संचालित हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के सहयोग से मेरठ,आगरा, गोरखपुर और वाराणसी में चार और नए एसटीपीआई सेंटर्स का निर्माण किया जा रहा है।

हाल के वर्षों में यूपी की राजधानी लखनऊ की पहचान आईटी सिटी के रूप में बनी है। कम समय में ही इस क्षेत्र में आईटी/आईटीईएस निर्यात का आंकड़ा 200 करोड़ रुपए तक पहुँच गया है। इन एसटीपीआई सेंटर्स के माध्यम से आईटीध्आईटीईएस कंपनियों को इन्क्यूबेशन सर्विस भी प्रदान की जा रही हैं। भारत सरकार की इंडिया बीपीओ प्रमोशन स्कीम के तहत 15 कंपनियों ने राज्य में 9 विभिन्न स्थानों पर बीपीओ केंद्र स्थापित किए हैंए जिसके माध्यम से इन शहरों के स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल रहा है।

कई राष्ट्रीय स्तर की प्रयोगशालाओंए बायोस्टेटिक्स और हेल्थ इंफॉर्मेटिक्स में शोध के लिए विख्यात एसजीपीजीआई और केजीएमयू जैसे प्रमुख मेडिकल कॉलेजों कई विश्वविद्यालयों, आईईटी जैसे इंजीनियरिंग कॉलेजों और आईआईएम, आईआईआईटी जैसे संस्थानों के कारण लखनऊ की पहचान एक साइंस सिटी के रूप में बनी है। इसलिए मेडटेक सीओई फायदेमंद साबित होगा और मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में क्षेत्रए राज्य और देश के विकास में योगदान देगा।

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