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भारत की कार्डामम पहाड़िया और इलायची - निखिलेश मिश्रा

Wednesday, August 12, 2020

/ by Dr Pradeep Dwivedi

 

-निखिलेश मिश्रा

इलायची का सेवन आमतौर पर मुखशुद्धि के लिए अथवा मसाले के रूप में किया जाता है। यह दो प्रकार की आती है- हरी या छोटी इलायची तथा बड़ी इलायची। जहाँ बड़ी इलायची व्यंजनों को लजीज बनाने के लिए एक मसाले के रूप में प्रयुक्त होती है, वहीं हरी इलायची मिठाइयों की खुशबू बढ़ाती है। मेहमानों की आवभगत में भी इलायची का इस्तेमाल होता है। लेकिन इसकी महत्ता केवल यहीं तक सीमित नहीं है। यह औषधीय गुणों की खान है। संस्कृत में इसे एला कहा जाता है।

छोटी इलायची को संस्कृत में 'एला', 'तीक्ष्णगंधा' इत्यादि और लैटिन में एलेटेरिआ कार्डामोमम कहते हैं। भारत में इसके बीजों का उपयोग अतिथिसत्कार, मुखशुद्धि तथा पकवानों को सुगंधित करने के लिए होता है। ये पाचनवर्धक तथा रुचिवर्धक होते हैं। आयुर्वेदिक मतानुसार इलाचयी शीतल, तीक्ष्ण, मुख को शुद्ध करनेवाली, पित्तजनक तथा वात, श्वास, खाँसी, बवासीर, क्षय, वस्तिरोग, सुजाक, पथरी, खुजली, मूत्रकृच्छ तथा हृदयरोग में लाभदायक है। इलायची के बीजों में एक प्रकार का उड़नशील तैल (एसेंशियल ऑएल) होता है।

छोटी इलायची का पौधा सदा हरा तथा पाँच फुट से १० फुट तक ऊँचा होता है। इसके पत्ते बर्छे की आकृति के तथा दो फुट तक लंबे होते हैं। यह बीज और जड़ दोनों से उगता है। तीन चार वर्ष में फसल तैयार होती है तथा इतने ही काल तक इसमें गुच्छों के रूप में फल लगते हैं। सूखे फल बाजार में 'छोटी इलायची' के नाम से बिकते हैं। पौधे का जीवकाल १० से लेकर १२ वर्ष तक का होता है। समुद्र की हवा और छायादार भूमि इसके लिए आवश्यक हैं। इसके बीज छोटे और कोनेदार होते हैं। मैसूर, मंगलोर, मालाबार तथा श्री लंका में इलायची बहुतायत से होती है।

अलटेरिया, जिसे हरी या छोटी इलायची भी कहते हैं, भारत से लेकर मलेशिया तक उगाई जाती है।

ऍमोमम, जिसे बड़ी इलायची, काली इलायची, भूरी इलायची, नेपाली इलायची, बंगाल इलायची या लाल इलायची भी कहते हैं, एशिया और ऑस्ट्रेलिया में उगाई जाती है।

खराश : यदि आवाज बैठी हुई है या गले में खराश है, तो सुबह उठते समय और रात को सोते समय छोटी इलायची चबा-चबाकर खाएँ तथा गुनगुना पानी पीएँ।

सूजन : यदि गले में सूजन आ गई हो, तो मूली के पानी में छोटी इलायची पीसकर सेवन करने से लाभ होता है।

खाँसी : सर्दी-खाँसी और छींक होने पर एक छोटी इलायची, एक टुकड़ा अदरक, लौंग तथा पाँच तुलसी के पत्ते एक साथ पान में रखकर खाएँ।

उल्टी : बड़ी इलायची पाँच ग्राम लेकर आधा लीटर पानी में उबाल लें। जब पानी एक-चौथाई रह जाए, तो उतार लें। यह पानी पीने से उल्टियाँ बंद हो जाती हैं।

छाले : मुँह में छाले हो जाने पर बड़ी इलायची को महीन पीसकर उसमें पिसी हुई मिश्री मिलाकर जबान पर रखें। तुरंत लाभ होगा।

बदहजमी : यदि केले अधिक मात्रा में खा लिए हों, तो तत्काल एक इलायची खा लें। केले पच जाएँगे और आपको हल्कापन महसूस होगा।

जी मिचलाना : बहुतों को यात्रा के दौरान बस में बैठने पर चक्कर आते हैं या जी घबराता है। इससे निजात पाने के लिए एक छोटी इलायची मुँह में रख लें।

इलायची का पौधा दो तरीके से उगाया जा सकता है।

१- इलायची के बीज से 

२- इलायची के पौधे से निकलने वाले पौधे से

बीज से इलायची को उगाना-

इलायची को बीज सा उगाना आसान काम नही है।क्योकि सबसे जरूरी चीज बीज है जो कि अच्छी क्वालटी का होना चाहिये ज्यादा पुराना बीज उगने में परेशान करता है। ताजा इलायची का बीज होने पर यह आसानी से उगाया जा सकता है। इलायची को बीज से उगाने के लिये आद्रतायुक्त वातावरण चाहिये जो कि समुद्रतटीय इलाको में होता है।गर्मी और नमी दोनो सही होने पर इलायची उगा सकते है। इलायची का पौधा केले के पौधे की तरह ज्यादा पानी और गर्म मौसम पसंद करता है इलायची को लाल और काली मिट्टी पसंद है अगर आपके यहां बलुई चिकने काली मिट्टी है तो आप इलायची के पौधे को बड़ी आसानी से उगा सकते हैं।इलायची के पौधे पर फरवरी-मार्च के बाद अप्रैल में बहुत सुंदर सुंदर फूल आते हैं। बरसात के समय इस पर फल लगते हैं जो कि गुच्छों के रूप में होते हैं। छोटी छोटी इलायची देखने में बड़ी सुंदर दिखती है।

इलायची के पौधे की देखरेख-

दक्षिण भारत में इलायची की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है केरल तमिल नाडु पूर्वोत्तर भारत के कई राज्य असम मेघालय जहां पर बड़े स्तर पर बरसा और गर्म मौसम रहता है या समुद्र तटीय राज्य जहां पर समय-समय पर भारी बारिश होती है ऐसे लाइव इलाकों में इलायची की खेती बड़े स्तर पर आसानी से की जा सकती है अगर आप उत्तर भारत में इलायची के पौधे को उगाना चाहते हैं तो आपको कुछ चीजों का ध्यान रखना होगा। इलायची का पौधा काफी तेजी से ग्रोथ करता है तो इसे जमीन में लगाने की कोशिश करें अगर आप गमले में लगाने की सोच रहे, तो काफी बड़ा गमला आपको प्रयोग करना चाहिए। इलायची के पौधे से बहुत सारे पौधे तैयार हो जाते हैं जो कि समय-समय पर जड़ों के पास से निकल कर तैयार होते हैं इलायची के पौधे में काफी तेजी से विकास होता है इसलिए से ज्यादा पानी और ज्यादा भोजन की जरूरत होती है ऐसी जगह जहां पर पानी की पूर्ति हो सके धूप में मिलनी चाहिए।

इलायची के पौधे के लिये खाद-

इलायची के पौधे के लिए गोबर खाद सबसे बेहतर खाद होती है ऑर्गेनिक खाद से उगाया गया पौधा काफी अच्छा मजबूत और तेजी से विकास करता है इसके अलावा इससे जो इलायची हमें मिलती है वह पूर्ण रूप से शुद्ध होती है उसके अंदर कोई भी जहरीले तत्व या कीटनाशक नहीं होते। इलायची के पौधे में आप बनाना पील फर्टिलाइजर प्रयोग कर सकते हैं। इसके अलावा लाल मिट्टी भी पौधे में दी जा सकती।

प्रस्तुत लेख हेतु बाह्य श्रोतों का यथास्थान उपयोग किया गया है।

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