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कान्हा से पुकार - अन्जनी अग्रवाल ओजस्वी

Wednesday, August 12, 2020

/ by Dr Pradeep Dwivedi

अन्जनी अग्रवाल ओजस्वी (श्याम नगर कानपुर)

मोह माया , स्वार्थ छल।

नही है ,अब कोई हल ।।

दिल देता बधाई, बारम्बार।

हो खुशियों भरा , त्यौहार।।

पर आशाएं,हैं भरी पड़ी  ।

कान्हा दो, खुशियाँ बड़ी बड़ी।।

कोरोना काल, होता नही खत्म।

जरा धो दो  ,अब ये जख्म।।

निरोग का अमृत,बरसा दो ।

ऐसी अब कोई ,धुन बज दो।।

अशांत मन, आस्थाएं त्यागे ।

छल कपट भरा, कोरोना भागे।।

प्रीत तुम्हारी,न होगी कम।

बिन जीवन,कैसे करेँ भजन।।

घर मन्दिर, सारे बन्द पड़े ।

स्तुति तुम्हारी, कैसे हम करें।।

तुम बिन अब,न कोई  सहारा ।

जिसने हर विपदा से पार उतारा।

बिन तेरी धुन,राधा भी बेचन ।

न मिले दिन में,न रात में चैन।।

कर दो ऐसा, कोई चमत्कार।

हो जाए चहुओर, जयजयकार।।

हो मन प्रफ़ुल्लित, सब प्रकार।

मनाएं हर्षोल्लास से, ये त्यौहार।।

एक बार तो, जग को निहारो।

मानव को ,इस त्रासदा से उबारो।।

करती विनती अन्जनी कर जोड़।

ला दो कोरोना का, कोई  तोड़ ।।

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