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आओ कान्हा मेरे सुने आंगन में - शिखा अस्तित्व

Monday, August 10, 2020

/ by Dr Pradeep Dwivedi

शिखा अस्तित्व


आओ कान्हा आओ मेरे सुने आंगन मे

आंखे भी पथरा गयी हैं

सुख गए हैं आंसू भी

खत्म कर दो इंतज़ार मेरा

किलकारी की गूंज ले आओ

आओ कान्हा आओ मेरे सुने आंगन में

मुस्कान मधुर सी ओठो पे

मोहक सूंदर सा मुखड़ा

पॉव में पैजनिया सजा के

हाथो में मुरली ले आओ

आओ कान्हा आओ मेरे सुने आंगन में

नटखट सी चाल तेरी

घुंगराले काले बाल तेरे

मेरी भी छवि झलके तुझ में

हाथो में माखन ले आओ

आओ कान्हा आओ मेरे सुने आंगन में

सबकी गोद में खेले तुम

मुझ को भी अपना जानो

मेरी ममता की प्यास बुझाने

मोर पंख भी साथ ले आओ

आओ कान्हा आओ मेरे सुने आंगन में

मन में तेरी आस लगी है

प्यास लगी इन आँखों को

बंजर सी इस धरती पे मेरे

बारिश की बूंदे बन आओ

आओ कान्हा आओ मेरे सुने आंगन में

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