Responsive Ad Slot

देश

national

मौत से ठन गयी - स्व अटल बिहारी वाजपेयी

Sunday, August 16, 2020

/ by Dr Pradeep Dwivedi

स्व अटल बिहारी वाजपेयी

झूझने का मेरा इरादा न था

मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था

रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गयी

यू लगा जिन्दगी से बड़ी हो गयी

मौत की उमर ही क्या है?दो पल भी नही

जिन्दगी सिससिला आज कल की नही

मै जी भर जिया मै मन से मरूं

लौटकर आऊंगा कूच से क्यूँ डरुं??

तू दबे पाव चोरी छिपे से न आ

सामने वार कर फिर मुझे आजमा

मौत से बेखबर जिन्दगी का सफर

शाम हर शुरमई रात बंसी का स्वर

बात ऐसी नही की कोई गम ही नही

दर्द अपने पराये कुछ कम भी नही

प्यार इतना परायो से मुझको मिला

न अपनो से बाकी है कोई गिला

हर चुनौती से दो हाथ मैने किये

अंधियो मे जलाये जलते हुए दिए

आज झकझोरता तेज तूफान है

नाव भवरो की बांहो मे मेहमान है

पार पाने का कायम मगर हौसला

देख तेवर तूफां का तेवरी तन गयी

( Hide )
  1. राधेकृष्णा, अटल जी को शत शत नमन

    ReplyDelete

Don't Miss
© all rights reserved
Managed By-Indevin Infotech-Leading IT Company