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शबरी बनूं या मीरा मैं - पूजा खत्री

Wednesday, August 5, 2020

/ by Dr Pradeep Dwivedi

मांगते हैं हम थोड़ी सी 
खुदाई जीने के लिए

पर क्यूं इसका 
कुछ सार तो तू बता 

दुनिया की बुरी नजर का
 उतारा करूं हर बार

गर इक बार मेरे दिल में
 आके घर तो तू बसा

महबूब मेरे बड़ी तश्नगी है 
तुझे में मिल जाने की

या तू मेरा प्रेमी बन या 
मुझे इश्क़ की जात तू बता

जीत लिया शबरी के झूठे
बेर ने राम के प्रेम धन को

अब शबरी बनूं या मीरा मैं
या अहिल्या की बात तू बता

लेखिका - पूजा खत्री
लखनऊ

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