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कहां से आया समोसा? - निखिलेश मिश्रा

Thursday, August 13, 2020

/ by Dr Pradeep Dwivedi

निखिलेश मिश्रा, लखनऊ

समोसा एक तला हुआ या बेक किया हुआ भरवां अल्पाहार व्यंजन है। इसमें प्रायः मसालेदार भुने या पके हुए सूखे आलू, या इसके अलावा मटर, प्याज, दाल, कहीम कहीं मांसा भी भरा हो सकता है। इसका आकार प्रायः तिकोना होता है किन्तु आकार और नाप भिन्न-भिन्न स्थानों पर बदल सकता है। अधिकतर ये चटनी के संग परोसे जाते हैं। ये अल्पाहार या नाश्ते के रूप में भारतीय उपमहाद्वीप, दक्षिण पूर्व एशिया, मध्य एशिया, दक्षिण पश्चिम एशिया, अरब प्रायद्वीप, भूमध्य सागर क्षेत्र, अफ़्रीका का सींग, उत्तर अफ़्रीका एवं दक्षिण अफ़्रीका में प्रचलित हैं।

समोसा दक्षिण एशिया का एक लोकप्रिय व्यंजन है। इस लज़ीज़ त्रिभुजाकार व्यंजन को आटा या मैदा के साथ आलू के साथ बनाया जाता है और चटनी के साथ परोसा जाता है। ऐसा माना जाता है कि समोसे की उत्पत्ति उत्तरी भारत में हुई और फिर यह धीरे-धीरे पूरे भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश सहित आस-पास के क्षेत्रों में भी काफी लोकप्रिय हुआ। यह भी माना जाता है कि समोसा मध्यपूर्व से भारत आया और धीरे-धीरे भारत के रंग में रंग गया। 

कुछ इतिहासकारों का कहना है कि दसवीं शताब्दी में मध्य एशिया में समोसा एक व्यंजन के रूप में सामने आया था। 13-14 वीं शताब्दी में व्यापारियों के माध्यम से समोसा भारत पहुँचा। महान कवि अमीर खुसरो (1253-1325) ने एक जगह जिक्र किया है कि दिल्ली सल्तनत में उस दौरान स्टड मीट वाला घी में डीप फ्राई समोसा शाही परिवार के सदस्यों व अमीरों का प्रिय व्यंजन था। 14 वीं शताब्दी में भारत यात्रा पर आये इब्नबतूता ने मो० बिन तुगलक के दरबार का वृतांत देते हुए लिखा कि दरबार में भोजन के दौरान मसालेदार मीट, मूंगफली और बादाम स्टफ करके तैयार किया गया लजीज समोसा परोसा गया, जिसे लोगों ने बड़े चाव से खाया। यही नहीं 16वीं शताब्दी के मुगलकालीन दस्तावेज आईने अकबरी में भी समोसे का जिक्र बकायदा मिलता है।

समोसे का यह सफर बड़ा निराला रहा है। समोसे की उम्र भले ही बढ़ती गई पर पिछले एक हजार साल में उसकी तिकोनी आकृति में जरा भी परिवर्तन नहीं हुआ। आज समोसा भले ही शाकाहारी-मांसाहारी दोनों रूप में उपलब्ध है पर आलू के समोसों का कोई सानी नहीं है और यही सबसे ज्यादा पसंद भी किया जाता है। इसके बाद पनीर एवं मेवे वाले समोसे पसंद किये जाते हैं। अब तो मीठे समोसे भी बाजार में उपलब्ध हैं। समोसे का असली मजा तो उसे डीप फ्राई करने में है, पर पाश्चात्य देशों में जहाँ लोग कम तला-भुना पसंद करते हैं, वहां लोग इसे बेक करके खाना पसंद करते हैं। 

भारत विभिन्नताओं का देश है, सो हर प्रांत में समोसे के साथ वहाँ की खूबियाँ भी जुड़ती जाती हैं। उत्तरप्रदेश व बिहार में आलू के समोसे खूब चलते हैं तो गोवा में मांसाहारी समोसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। पंजाबी समोसा खूब चटपटा होता है तो चाइनीज क्यूजीन पसंद करने वालों के लिए नूडल्स स्टड समोसे भी उपलब्ध हैं। बच्चों और बूढ़ों दोनों में समोसे के प्रति दीवानगी को भुनाने के लिए तमाम बहुराष्ट्रीय कम्पनियां इसे फ्रोजेन फूड के रूप में भी बाजार में प्रस्तुत कर रही हैं।

समोसा ईरान से भारत में आया है। यह ईरान की डिश थी। सबसे पहले इसका जिक्र इतिहासकार अबुल-फज़ल ने किया था। इतिहासकार अबुल-फज़ल ने ग़ज़नवी साम्राज्य के महल में पेश की जाने वाली एक नमकीन डिश का जिक्र करते हुए बताया कि उसमें सूखे मेवे और चिकन भरा होता था, लेकिन वहां से भारत की यात्रा के लिए आये लोगों के कारण यहां आने तक समोसे का रूप रंग ही बदल गया ।

समोसा ईरान से निकल कर एशिया की पहाड़ियों से होता हुआ अफगानिस्तान पहुंचा। दूसरे देशों से आने वाले लोगों ने समोसे में काफी बदलाव अपने समय के अनुसार किये और इसी कारण इसका आकार भी बदल गया। इसको बनाने की विधि ईरान जैसी ही थी एक लम्बे समय बाद समोसे ने हिंदुकुश पर्वत को पार किया और भारतीय उपमहाद्वीप में प्रवेश किया। भारत में आने के बाद इसे यहां के हिसाब से बदल दिया गया जैसे कि इसके अंदर के चिकन की जगह उबले आलू ने ले ली। भारत में समोसे में जीरा, धनिया, हरी मिर्च और न जानें क्या-क्या मसाले डाल कर उसका स्वाद ही बदल गया ।

13 से 14वीं सदी में यह मध्य ऐशिया से होता हुआ भारत आया तभी से यह भारतीयों का काफी पसंदीदा Snacks रहा है उनसे पहले भी 10वीं शताब्दी में भी समोसे का जिकर किया गया है । 13वीं - 14 वीं शताब्दी में यह व्यापारियों के माध्यम से भारत आया था। 16 वीं सदी के मुगलकालीन दस्‍तावेजों में भी समोसे का जिक्र किया गया है । मुगल काल में व्यापारी लोग साथ ले जाने के लिये इन्हें बनवाया करते थे और बड़े चाव से वह यह खाया करते थे ।

समोसे को अलग अलग जगह अलग अलग स्वाद और अलग अलग नामों से जाना जाता है। समोसे को अंग्रेजी में तो समोसा ही कहते है लेकिन हमारे देश में ही कई नामों से इसे खाया जाता है। इसे उर्दू में सम्‍बुसका तो मध्‍य एशिया में सम्‍सा और ईरान में सन्‍बुसे के नाम से जाना जाता है। झारखंड और उड़ीसा में सिंघाड़ा के नाम से जाना जाता है, इसे गुजराती में सुमोस कहा जाता है। हैदराबाद में समोसे का छोटा वर्जन मिलता है जिसके मसाले में चिकन भी होता है उसे लुख्‍मी कहते हैं।

आज तरह तरह के समोसे हम बाज़ार में खा सकते हैं। जैसे ची़ज समोसा, पिज़्ज़ा समोसा ,मिक्स वेज समोसा , मटर का समोसा, ड्राई फ्रुट्स का समोसा, दाल का समोसा आदि। फिर भी हमारे नार्थ इंडिया में हम आज भी आलू मसाला वाला समोसा खाना पसंद करते हैं जबकि साउथ में स्पेशल नॉनवेज के समोसे खाने में आते हैं। साउथ के लोग इसे काफी पसंद करते हैं।

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