Responsive Ad Slot

देश

national

चाँद पे डेरा डाला तुमने - शबनम मेहरोत्रा

Tuesday, August 4, 2020

/ by Dr Pradeep Dwivedi

चाँद पे डेरा डाला तुमने 
मैं धरा की गंदुबी गर्द हूँ 
चाँदनी रात है 
चाँद न ढलने दूँगी 
मुठ्ठी में भर लूँगी
सीना तान खड़ी होकर 
मेघों को बिखराऊंगी 
तुम चाँद के डोले से 
उतर आना 
आज न जाना 

तुम ही मेरे 
मेरे प्यार के अखंड दीप 
मेरे मनमीत 
आत्म संगम चाहती हूँ 
अनुपम राग 
रसधार में नहाकर
काल के कपाल पर 
नया इतिहास 
गढ़ना चाहती हूँ 
तुम धमनियों का प्रवाह हो 
तुममें समाना चाहती हूँ 

तुम्हारी रग-रग में, 
अंग-अंग में 
बहना चाहती हूं 
तुम्हारे मन में, 
तुम्हारे तन में और 
तुम्हारे जीवन में
हो जाना चाहती हूं अभिन्न 
और अनंग तुमसे 
गूंजना चाहती हूं फिर से 
तुम्हारे हृदय के स्पंदन में।

लेखिका - शबनम मेहरोत्रा 
कानपुर

No comments

Post a Comment

Don't Miss
© all rights reserved
Managed By-Indevin Infotech-Leading IT Company