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बिजली उद्योग मे बडकाबाबूओ के लूट की दास्तान

Friday, August 28, 2020

/ by Dr Pradeep Dwivedi

लखनऊ।  

पाठको के मन मे यह सवाल बार बार कौध रहा होगा कि आखिर यह बनिये क्यो खरीदना चाहते है उत्तर प्रदेश का घाटे का बिजली विभाग? तो सबसे पहले आपको जानना होगा कि किस तरह से नियमो की और तो और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की किस तरह से धज्जियां उड़ाते हुए किस बेदर्दी से  इन बडका बाबू जी लोगो ने जनता के धन का अपने फायदे के लिए किस तरीके से दुरुपयोग किया है । आज का उपभोक्ताओं से जुड़ा बडका बाबू जी लोगो का एक छोटा सा नन्हा-सा  घोटाला यानि कि स्मार्ट मीटर घोटाला यानि कि 1800 करोड़ का एक छोटा सा घोटाला । पाठको को यह जान कर आश्चर्य होगा कि पूरे देश मे सिर्फ उत्तर प्रदेश मे ही स्मार्ट मीटर लगाने का फैसला किया गया परन्तु प्रयोग करने के लिए EESL को बिना किसी टेण्डर के काम दे दिया गया और उसने L&T को मीटर लगाने का काम दे दिया और मध्याचल विद्युत वितरण निगम मे  बिना किसी लिखा पढी या समझौता किये हुए अवैध तरीके से लेसा मे मीटर लगाने का काम शुरू कर दिया यह तो सब ही जानते हैं अब जाने इसके अन्दर की कहानी। पाठको यह बताना जरूरी है कि उत्तर प्रदेश राज्य नियमक आयोग को 10 करोड़ से ज्यादा की किसी भी तरह के प्रोजेक्ट या खरीदारी के लिए राज्य नियामक आयोग की इजाजत लेनी जरूरी है अगर पावर कार्पोरेशन को बिजली का दाम बढाना होता है तो भी नियामक आयोग की इजाजत जरूरी होती है* परन्तु बडका बाबू लोगो  के आगे सारे नियम कानून फेल हो जाते है जहाँ भी इनके कदम पड जाते है तो उस जगह से ऐसा लगता है कि लक्ष्मी रूठ के कही चली जाती है अगर आप जानते है कि कहाँ खैर मुझे नही मालूम की वो पाठक जानते है ?? खैर मध्याचल विद्युत वितरण निगम मे  भी तो एक अवैध रूप से नियुक्त बडका बाबू बैठा था यहाँ भी यही हुआ ना नियम ना कानून सभी कुछ  बडका बाबू के जूते की नोक पर नियामक आयोग ने तो पहले वाले बडका बाबू और उनकी सहयोगी विधि विशेषज्ञा महोदया को जिम्मेदार माना है वैसे भी नियम ना कानून महोदया ने जो कह दिया वो सही  शायद आप लोग नही समझे यह महोदया तो अपने सीनियर  बडका बाबू जी से भी कई कदम आगे है संविधान को भी ठेगा दिखा कर काम करने कोई इनसे सीखे  केन्द्रीय सरकार के बनाएँ नियम कानूनो की धज्जियां कैसे उडाई जाती है कोई इनसे सीखे केन्द्रीय वित्तीय मंत्रालय भारत सरकार के बनाई हुई नियमावली  को तोडते हुए अपने नियम कानून उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन पर थोपे वही इसी जगह उत्तर प्रदेश पारेषण निगम मे वही नियमावली लागू है यानि यहाँ भी नियम कानून जूते के नीचे सयुक्त उद्यम की नियमावली  यहाँ  पर लागू नही है लेकिन वही नियमावली पारेषण निगम मे चल रहे है । करोडो के ऐप व साफ्टवेयर   बनाने के एकल निविदाएं तो ऐसे बाटी कि  उसकी क्या मिसाल दी जाएँ पूर्व यहा की कमान संभालने वाली महारानी एकल निविदा के माध्यम से एप व साफ्टवेयर  बनाने वाली कम्पनियो को करोड़ो की निविदा देकर एप व साफ्टवेयर  बनवाये जबकि खुद UPPCL में आईटी के बड़े बड़े जानकर आज भी विभाग में बैठ कर मख्खियां मारने का काम कर रहे हैं यानि कि सहलाकारो ने सलह दी कि कैसे घोटाले किया जाए और देश नही बिकने दूँगा का नारा लगाने वाली सरकार आज घाटे की दुहाई देकर उ प्र के उपभोक्ताओं के हित के विभाग को बेचने के लिए बनियो को गोद में बैठा कर प्रदेश के बिजली उद्योग को बनिये के हाथ बेचने पर आमादा है यानी नारे खत्म अब देश और प्रदेश को बेचने का कारोबार शुरू।

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