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वायरल जिज्जी का संघरोध- भाग १ - आशुतोष राना

Friday, August 28, 2020

/ by Dr Pradeep Dwivedi

आशुतोष राना ( प्रसिद्ध अभिनेता व लेखक)

पूरे क़स्बे में वायरल जिज्जी की प्रसिद्धि सबसे बड़ी भक्त और महाधर्मात्मन की थी, क्योंकि उनके ऊपर हर सोमवार देवी की नही महादेव की सवारी आती थी। सवारी वाले दिन उनके घर के बैठकखाने में दीन-दुखियों की भीड़ लगी रहती थी और वायरल जिज्जी माथे पर चंद्रमा और शरीर पर भभूत लगाकर बैठकख़ाने में तांडव करती हुई कभी श्रद्धालुओं की पीठ पर धौल जमातीं तो कभी कपड़े के सांप से प्रहार करके लोगों को आशीर्वाद देकर उनकी समस्याओं का समाधान करतीं, बदले में भक्तगण उनके पैर पड़ते और यथाशक्ति द्रव्य-दक्षिणा चढ़ाते। 

लेकिन जब से कोरोना की कूक सुनाई दी थी तब से वायरल जिज्जी की हवा बंद थी, लाख प्रयत्न करने के बाद भी महादेव के हाल की जगह कोरोना का ख़्याल रह-रह कर उनके दिमाग़ पर हावी हो जाता था। वायरल जिज्जी की दहशत का आलम ये था कि लॉकडाउन की घोषणा के साथ ही उन्होंने सबसे पहले अपने पति वायरल जीजा को अपने बेडरूम से बाहर निकाला और खुद को अकेला अपने कमरे में ही लॉक कर लिया था, धोबी और कामवाली बाई को भी छुट्टी दे दी थी, अपने घर में मुख्य द्वार पर अंदर से चार बड़े ताले डालकर चाबी अपने पास रख ली थी जिससे उनके पति वायरल जीजा किसी भी सूरत में घर से बाहर ना निकल सकें। परिणामस्वरूप झाड़ू, पोंछा, कपड़े, बर्तन से लेकर खाना बनाने और गुसलखाना साफ़ करने तक का सारा काम उनके पति वायरल जीजा को करना पड़ रहा था। वायरल जीजा चूँकि घर जमाई थे इसलिए वायरल जिज्जी के मन में उनके ऊपर पड़े हुए वर्क लोड के लिए किसी भी क़िस्म की चिंता, दया या ममता का भाव नहीं था क्योंकि घर जमाई के लिए शास्त्रों में लिखा ही है- 

गाँव दमंदा मूरखचंदा, द्वार दमंदा आधो। 

और घर दमंदा गधा बिरोबर, जो चाहे सो लादो॥ 

वायरल जिज्जी चौबीसों घंटे अपने बेडरूम को अंदर से लॉक करके बैठी रहतीं और अपनी आवाज़ में रिकॉर्ड किए हुए ॐ नम: शिवाय मंत्र के लूप को म्यूज़िक सिस्टम में वॉल्यूम बढ़ाकर लगा देतीं जिससे आवाज़ बेडरूम से बाहर वायरल जीजा को सुनाई देती रहे और वायरल जीजा को लगे की उनकी पत्नी तपस्या में लीन हैं। लेकिन वायरल पलंग पर बैठकर अपने कानों में ईयर फ़ोन फसाकर अपने मोबाइल की स्क्रीन पर हिंदी अंग्रेज़ी फ़िल्मों का मज़ा लूटतीं। 

सरकार द्वारा जारी सोशल डिसटेंसिंग के आदेश को वायरल जिज्जी ने गम्भीरता से लेते हुए अपने बैठकख़ाने में लगे टीवी का कनेक्शन और जीजा के फ़ोन का नेट भी कटवा दिया था, जीजा के फ़ोन पर मात्र इंकमिंग कॉल की सुविधा बची थी जिस पर वायरल जिज्जी अपने बेडरूम से फ़ोन करके उनको समय सारणी के साथ प्रतिदिन किए जाने वाले कार्यों का निर्देश दिया करती थीं साथ ही जीजा को कड़े शब्दों हिदायत दी थी की बाहर के किसी भी व्यक्ति की ना सूरत देखनी है ना सूचनाओं का आदान प्रदान करना है। 

जीजा ने कठिन समय में सूचना और सम्पर्क के महत्व पर अपना पक्ष रखा तो वायरल ने उसे ख़ारिज करते हुए कहा- कोरोना से ज़्यादा ख़तरनाक उससे सम्बंधित सूचनाएँ हैं ज़्यादा जानकारी से व्यक्ति की जान भी जा सकती है। सरकार ने सोशल डिस्टेंसिंग का आदेश जारी किया है इसका मतलब है की सिर्फ़ शरीर से ही नही नागरिकों को समाज और समाज में फैली सूचनाओं से भी दूरी बनानी है।  

तब जीजा ने कहा- आटा, दाल, चावल, साबुन, तेल, सब्ज़ी-भाजी की ज़रूरत पड़ेगी, उसके लिए तो बाज़ार जाना पड़ेगा ना ? 

जिज्जी ने उसका तोड़ निकालते हुए कहा- तुम हमको समान की लिस्ट दो हम पंसारी की दुकान पर फ़ोन कर दिया करेंगे उसका लड़का समान के साथ नीचे खिड़की के पास खड़ा हो जाएगा तुम रस्सी में बाल्टी फ़साकर नीचे डालो वो बाल्टी में समान रखेगा तुम उसको जैसे कुआँ से पानी खिंचते हैं वैसे ऊपर खींच लो, इसमें समस्या कहाँ है ? ये तप तपस्या का समय है जीजा, जैसे पांडवों ने अज्ञातवास भोगा था वैसे ही हमलोगों को एकांतवास भोगना होगा तभी हम ज़िंदा बचेंगे और जीजा का उत्साहवर्धन करते हुए बोलीं- अज्ञातवास के समय जैसे मान और जान कि रक्षा के लिए महाबली भीम को रसोईया बनना पड़ा था, महान धनुर्धारी अर्जुन को वृन्नहला बनना पड़ा था, नकुल और सहदेव को घोड़ों की लीद उठानी पड़ी थी वैसे ही अब से घर के ये सारे काम तुमको करने पड़ेंगे। 

शुरुआत के दिनों में जीजा के मन में भी कोरोना के लिए भयंकर इज़्ज़त थी बिलकुल वैसी ही जैसी नई-नई शादी के बाद ससुराल पक्ष में जीजाजी की होती है, उनको लग रहा था की कोरोना कुछ दिनों का मेहमान है कुछ दिनों बाद इज़्ज़त से चला जाएगा लेकिन चार-पाँच महीनों के बाद भी कोरोना जाने का नाम ही नही ले रहा था और ये भी नही पता की वो कब जाएगा ? तब किसी परिवार में जो हालत जीजा की फूफा हो जाने के बाद होती है बिलकुल वैसे ही भाव वायरल जीजा के हृदय में कोरोना के लिए पैदा हो गए थे जिसने खुद अपने हाथ से अपनी इज़्ज़त की मिट्टी कुटवा ली थी। 

जीजा के हृदय से भीम, नकुल, सहदेव, युधिष्ठिर के चरित्र ग़ायब हो गए थे उनके हृदय में स्वयं के लिए मात्र वृन्नहला का भाव बचा हुआ था। वायरल जीजा विद्रोह करना चाहते थे, वे अपने ही घर में सेंट्रल जेल के क़ैदी के जैसा महसूस कर रहे थे जिसे आजीवन सश्रम कारावास की सज़ा सुनाई गई हो, अपनी दुर्दशा और वर्तमान में ग्रहों की महादशा से कलपकर एक दिन वायरल जीजा ने बेडरूम के बंद दरवाज़े कि छोटी खिड़की में मुँह फसाकर अपनी पत्नी वायरल जिज्जी से कहा....


#क्रमशः...

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