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जनता की लापरवाही से बढ़ रहा कोरोना का ग्राफ- अतुल पाठक

Saturday, August 1, 2020

/ by Dr Pradeep Dwivedi
बात करते हैं शुरुआती आए कोरोना वायरस कोविड 19 की। जब कोरोना ने कदम रखा ही था हमारे देश में तब देशवासी बड़े ही गम्भीर थे इसको लेकर। 22 मार्च को जनता कर्फ़्यू में सब ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। मोदी जी के संबोधन को दिल से सुना और माना भी।  फिर 24 मार्च से 21 दिनों के लिए पहला लॉकडाउन हुआ उसमें भी सभी बड़ी धीर गम्भीर होकर लॉकडाउन का अनुसरण करते दिखे। धीरे धीरे लॉकडाउन में थोड़ी ढिलाई क्या बरती सरकार ने जनता समझने लगी सब कुछ आसान और सहज ही हो गया। इस महामारी को सभी ने हल्के में ले लिया। परिणाम आज हम सभी के सामने है। 

आर्थिक व्यवस्था को ध्यान में रखकर सरकार ने देश की आर्थिक स्थिति को सुधार में लाने के लिए कुछ चीजों जैसे दुकानों,बस, ट्रेन, शॉपिंग मॉल, बाज़ार इत्यादि पर रिहायत बरतने के निर्देश दिए गए। पर क्या किसी को अंदाज़ा इस रिहायत का आम लोग गलत फ़ायदा उठाएंगे। जी हाँ यह शतप्रतिशत कड़वा सच है कि लोगों ने सरकार से मिली लॉकडाउन में रिहायत का बेहद गलत फ़ायदा उठाया है और महामारी के इस दौर में कोरोना बीमारी को बिल्कुल भी गम्भीरता से नहीं लिया जिसके चलते जनता इस कदर लापरवाह हो गई है कि हज़ारों की तादाद में लोग बाज़ारों में भीड़ लगा रहे हैं। बहुत अधिक आवश्यकता होने पर ही लोगों को घर से निकलने की सलाह दी गई थी पर यहां क्या लोग बड़े ही बेफ़िकर हुए नज़र आ रहे हैं जैसे देश से यह बीमारी सदा के लिए चली गई हो। कामीदा लोग अपने कामकाज से बाहर निकल रहे हैं समझ आ रहा है। पर जिनको बहुत ज्यादा ज़रूरत नहीं कोई बाहर निकलने की वो भी फालतू घुमंतू बन रहे हैं यह बिल्कुल समझ नहीं आ रहा।
वाक़ई बेहद चिंता का विषय है। अनलॉक 2 क्या आया लोग बड़े ही लापरवाह होते चले गए हैं। निन्दनीय सोच बना ली है कि जो होगा सो देखा जाएगा। एक बात याद रखियेगा हमारी लापरवाही न सिर्फ हम पर या हमारे परिवार पर अपितु परिवार से समाज और समाज से नगर और नगर से देश पर अवश्य भारी पड़ेगी ये एक कड़वा सच है जिसे चाह कर भी झुठलाया नहीं जा सकता।
आज हज़ारों की संख्या में देश में कोरोना से मौत हो चुकी  है। लाखों की संख्या में कोरोना संक्रमित सक्रिय आँकड़े हैं। ऐसा कोई दिन नहीं जा रहा कि जिस दिन कोरोना के आँकड़े कम होने की खबर आई हो। दिन ब दिन कोरोना की मार पड़ती ही जा रही है। पर अब भी लोग ज़रा भी इसको लेकर जागरूक नहीं हैं। ऐसा लगता है जैसे जानबूझ कर लोगों ने अपनी आँखें मूद ली हों। 
अनलॉक 3 की बात करते हैं जो 1 अगस्त से लागू होने जा रहा है। अब देखना ये है कि जनता कितना सबक लेती है महामारी वाहक संदेश से। 
बड़े अचरज की बात है ना कि जब कोरोना के सक्रिय आँकड़े कम थे तब जनता बड़ी गम्भीर और भययुक्त थी।
आज जब कोरोना का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है तब जनता बड़ी लापरवाह और भयमुक्त है।

लेखक - अतुल पाठक "धैर्य"
जनपद हाथरस(उ.प्र.)

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