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भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान - खारे पानी का मगरमच्छ - -निखिलेश मिश्रा

Monday, August 17, 2020

/ by Dr Pradeep Dwivedi

-निखिलेश मिश्रा, लखनऊ

हाल ही में आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में एक महीने के अंदर दो मगरमच्छों को देखा गया था। ये मगरमच्छ आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम तट तथा श्रीकाकुलम तट पर देखे गए थे। खारे पानी के मगरमच्छ आमतौर पर ओडिशा के तटीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं। ऐसे में यह कयास लगाया जा रहा है कि यह प्रजाति ओडिशा तट से प्रवास कर रही है।

भारत में सुंदरबन तथा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह खारे पानी के मगरमच्छों के प्रमुख आवास हैं। सभी जीवित सरीसृपों में से यह मगरमच्छ सबसे बड़ा होता है जो लगभग 7 मीटर तक लंबा हो सकता है। यह दक्षिण-पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया में भी पाया जाता है।

भीतरकनिका राष्ट्रीय उद्यान : भीतरकनिका राष्ट्रीय उद्यान ओडिशा के बेहतरीन जैव विविधता हॉटस्पॉट में से एक है और यह अपने हरे मैंग्रोव, प्रवासी पक्षियों, कछुए, एस्चुराइन मगरमच्छ तथा अनगिनत संकरी खाड़ियों (creeks) के लिये प्रसिद्ध है। भीतरकनिका ब्राह्मणी, वैतरणी, ​​धामरा और महानदी नदी के मुहाने पर स्थित है। ऐसा माना जाता है कि यह उद्यान देश के 70 फीसदी एस्चुराइन या खारे पानी के मगरमच्छों का आवास है।

पार्क में खारे पानी के मगरमच्छों (क्रोकोडिलस पोरोसस),) सफेद मगरमच्छ, भारतीय अजगर, एक प्रकार के कालेपक्षी और बानकरों की अधिकता है। गाहिरमथा और पास के अन्य समुद्र तटों के घोंसलो पर ओलिव रिडले समुद्री कछुए (लेपिडोचेलिस ओलिवासिया) हैं।

राष्ट्रीय उद्यान को सितम्बर 1998 में भितरकनिका वन्यजीव अभयारण्य के कोर क्षेत्र से बनाया गया, जिसका निर्माण 1975 में किया गया था।

वनस्पति : कच्छ वनस्पति, सुंदरी, थेस्पिया, कासुअरिना जैसे वृक्ष और नील झाड़ी और कई अन्य घास हैं।

जीव : खारे पानी के मगरमच्छ, सफेद मगरमच्छ, भारतीय अजगर, एक प्रकार के काले पक्षी, जंगली सूअर, रीसस बंदरों, चीतल, बानकर, कोबरा, पानी में रहने वाली छिपकली आदि इस उद्यान की शोभा हैं। गाहिरमथा और अन्य पास के समुद्र तटों के घोंसले पर ओलिव रिडले समुद्री-कछुए रहते है। भारत में सबसे बड़े खतरे में रहे समुद्री मगरमच्छ की आबादी भितरकनिका में उपलब्ध है और 10 प्रतिशत वयस्क कछुओं की लंबाई 6 मीटर की है जो कि दुनिया भर में अनूठा है। लगभग 700 समुद्री मगरमच्छ नदियों और खाड़ियों में रहते हैं।

एवियन-पशुवर्ग : किंगफिशर की आठ किस्मों सहित पक्षिवृन्द की 215 प्रजातियां यहां पाए जाते हैं। एशियाई ओपन बिल, जलकौवा, बानकर, एक प्रकार के काले पक्षी, एग्रेट्स, जैसे पक्षियों को अक्सर उद्यान में देखा जाता है।

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