Responsive Ad Slot

देश

national

डायरी के पन्नों से - प्रतिमा 'प्रीत'

Wednesday, September 2, 2020

/ by Dr Pradeep Dwivedi


प्रतिमा 'प्रीत' ( जौनपुर, उ0प्र0)

प्रेम तुमको भी है 

और प्रेम मुझको भी 

तुम मेरे प्रेम में हो

और मैं प्रकृति के!!!


तुम चाहते हो

पूर्ण अधिकार

मैं  तलाश में हूँ 

निश्च्छल प्रेम के!!


तुम्हे पसंद है

फूल गमलों के 

और मुझे , मुझे

आकर्षित करता है

व्योम तले का 

गुलमोहर!!


कृत्रिम ताल-पोखर

भाते हैं तुम्हें

और मुझे

आकर्षित करता है

चाँद को छूने के लिए

उफनता सागर!!


तुम्हे काँच में

तैरती मछलियों

का शौक है

मुझे गहरे सागर का!!


तुम सोने के पिंजरे 

में बुलबुल को 

जीवन देना चाहते हो

और मुझे जाना है

सूरज के पार!!


तुम्हे खिली धूप से

लगाव है

मुझे पसंद है घुमड़ते हुए

आपस में गले लगते

बादल!!


सदैव ही तुमने

पुष्प वाटिकाओं की

सैर की है

मुझे बाँधता रहा है

वन प्रदेश का 

उन्मुक्त जीवन!!


तुम हकीकत में

मुझे पाना चाहते हो

और मैं तुमको 

जी भर जीती आयी हूँ

अपने मासूम से

ख़्वाबों में!!


छोड़ दो तुम

कंक्रीटों के ख़्वाब देखना

और कर लो प्रेम प्रकृति से 

मेरी तरह

बिना किसी शर्त के!!

No comments

Post a Comment

Don't Miss
© all rights reserved
Managed By-Indevin Infotech-Leading IT Company