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बेटी वो बेशकीमती हीरा - अन्जनी अग्रवाल 'ओजस्वी

Sunday, September 27, 2020

/ by Dr Pradeep Dwivedi
अन्जनी अग्रवाल 'ओजस्वी'-कानपुर नगर 


बेटी वो बेशकीमती हीरा।

न मिले तो जीवन होता अधूरा।।

बेटी तो कुदरत की सुंदर रचना।

सजा दे माँ -पापा का सपना।।

जो मुस्कुराए तो हंसे फुलवारी।

नही तो मुरझा जाती क्यारी ।।

कितनी चंचल कितनी नटखट।

सजाए सपने हकीकत झटपट।

बेटी तो अंतर्मन की दीप्त।

बिन उसके नही जीवन संगीत।।

मेरी बेटी मेरा अभिमान।

बढ़ाये जीवन में स्वभिमान।।

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