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अलग हूं थोड़ा इस जहां से - पूजा खत्री

Wednesday, September 23, 2020

/ by Dr Pradeep Dwivedi

पूजा खत्री (लखनऊ)

सुना है कि फासले 

दिलों की दूरियों को 

बढ़ा देते हैं.......

शायद इसलिए

दिल ने हर पल तुम्हें

गुनगुना

छोड दिया है........

भले ही चले 

होंगे हम कई कदम

साथ साथ.......

अब चाहतों

के रंग में डूबना

छोड़ दिया है........

बामुश्किल 

ही थमी होगी 

वो फ़िक्रे जज्बात........

जज्बाते इंतिहा

से जब हमने मुख 

मोड़ लिया है..........

कि थक सा गया

हूं इस सफर को 

तय करते-करते........

अब मंजिल की दूरी 

को मापना भी 

छोड़ दिया है ..........

माना कि 

अलग हूं थोडा 

मैं इस जहां से बेफ़िक्रे........

 इस जहां से ही

 दिल लगाना छोड़

दिया है

हां दिल लगाना 

छोड़ दिया है..

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