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आओ! कुछ पेंड़ लगाय देइ - इन्द्रेश भदौरिया रायबरेली

Monday, September 7, 2020

/ by Dr Pradeep Dwivedi

 

इन्द्रेश भदौरिया  (रायबरेली)

रहै हरी - भरी आपनि धरती।

जो भूमि होय आपनि परती।

जामुन महुआ अमरूद आम।

खइहैं मनई  होई  बहुत नाम।

बिरवा  यहि बरे लगाइत  हम-

कुछ तो जग नाव कमाय लेइ।

आओ--------------------------।

जो  पेंड़  लागि हैं  हरे - भरे।

तुम । काहे  काटत हवो अरे।

यह चली जाइ जो  हरियाली।

होइहैं  बन- बाग सबै खाली।

यहि लिए न इनका काटो तुम-

थ्वारा तुमका  समुझाय देइ।

आओ------------------------।

जब हरे पेंड़ सब कटि जइहैं।

दुख अउर दलिद्दुर बढ़ि जइहैं।

जब मिली न सुद्ध हवा- पानी।

फिरि  आयी  यादि सबै नानी।

तब  तरह  - तरह कै  बीमारी -

तुम्हरे  चोला  का  खाय लेइ।

आओ-------------------------।

हम  हरे  पेंड़  ना नस्ट  करी।

हम सुख कै राह प्रसस्त करी।

हुवै  वातावरन  सुद्ध  अपना।

बसि यहै एकु  आपन सपना।

जेहिते जगका सुख-सान्ति मिलै-

वह काम  सबै  अपनाय  लेइ।

आओ--------------------------।

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