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तुम जानते हो वो काला जादू? - नूतन गुप्ता

Tuesday, September 29, 2020

/ by Dr Pradeep Dwivedi

नूतन गुप्ता ( जयपुर, राजस्थान)


नींद का आमंत्रण है मुझको

कि पलकें जब सह नहीं पातीं

दिन का बोझ तो 

नींद ही तो देती है सहारा। 


मुझे कोई संघर्ष नहीं करना पड़ता 

नींद करती है मेरे हिस्से का संघर्ष 

भागती रहती है रात के पीछे

झपटने के लिए रात का कोई कोना। 


पकड़ में आ ही जाती है रात

कभी पूरी 

कभी अधूरी 

और कभी चौथाई सी। 


नींद को रात मिले

तो मुझे मिल सकते हैं सपने

मुझे सपने मिल जाएँ अगर 

तो मिल जाओगे तुम भी 

कहीं न कहीं। 


हम मोहताज हैं सपनों के 

और सपने नींद के। 

करदे कोई काला जादू

तो छा जाए दिन में भी 

रात सा अंधेरा। 


नींद को मिल जाए साथी 

और मुझे एक सपना

वो सपना

जो लटका रहता है हर दम

बाहर हरे नीम के पेड़ पर। 

नीम के साथ उसमें भी 

खिल जाती है रोज़ कोई नई कोंपल। 


वैसे उस नीम को लग चुका है दीमक

हो सकता है

सपने पा जाएँ नींद

और नींद पाले रात को। 

तुम भी

लौट आना  सपने में

उससे पहले ही कि दीमक

चट कर जाए पेड़ 

और मेरा सपना भी। 

तुम जानते हो वो काला जादू?

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  1. क्या बात है!! बहुत सुंदर कविता ♥️♥️

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  2. क्या बात है!! बहुत सुंदर कविता ♥️♥️

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