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समानता स्त्री व पुरुष की - दीप्ति गुप्ता

Tuesday, September 8, 2020

/ by Dr Pradeep Dwivedi

दीप्ति गुप्ता ( रांची, झारखंड)

रोज ही हम सुनते हैं,

बातें बहुत गुनते हैं,

स्त्री और पुरुष की,

स्वतंत्रता और समानता,

आचार व विचार,

 बुद्धि व सदव्यवहार ।

स्त्री आज पढ रही है,

 हर क्षेत्र में वह बढ़ रही,

विश्व में उन्नति पा रही है

 स्त्री समानता पा रही,

 इज्जत उसकी बढ़ रही,

 हिम्मत उसकी बढ़ रही है

यह सब प्रयत्न है उसके,

 यह एहसान नहीं है पुरुष के ।

वास्तव में होगे वे

 उस दिन से सामान,

 जिस दिन पुरुष उसे,

 मानेंगे अपने समान,

 न कि एक अदद सामान,

नहीं वे  उम्मीद करेंगे,

 उससे होने की महान,

 वह होगी सिर्फ इंसान,

 उस दिन हो जाएगी,

 वह पुरुष के समान ।

 जिस दिन ---

धरती सी सहनशील,

गंगा सी पवित्र,

गाय सी सीधी,

 संतोषी सेवाभावी,

 त्याग की मूर्ति,

 देवी इत्यादि विशेषण,

न समझे जाएंगे गुण,

 होंगे ये उसके शोषण ।

जिस दिन---

माल और चीज़,

चरित्र और पवित्र,

 धांसू और नमकीन,

 कुंवारी या जो़रदार,

जैसे शब्द,

 या तो स्त्री के लिए,

 इस्तेमाल होना होंगे बंद,

 या फिर पुरुषों के लिए भी,

 इस्तेमाल किए जाएंगे ।

उसी दिन वास्तव में,

 स्त्री पुरुष के सारे,

 भेद मिट पाएंगे,

वह उस दिन से समान हो जाएंगे,

न  कि सिर्फ समान कहलाएंगे ।।

                                

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