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टाइगर ज़िंदा है - आशुतोष राना

Sunday, September 6, 2020

/ by Dr Pradeep Dwivedi

आशुतोष राना ( अभिनेता एवं लेखक )

जब से सरकार बदली थी भाईसाहब का सारा तेज समाप्त हो गया था क्योंकि भाईसाहब भूतपूर्व सरकार में मंत्री थे, भाईसाहब को रातों रात अपनी कार में लगी तख़्ती से अपना स्टैटस बदलकर मंत्री के आगे भूतपूर्व लिखने के लिए विवश होना पड़ा था। 

इस तख़्ती परिवर्तन का भाईसाहब के स्वस्थ पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा और कल तक जर्मन शेपर्ड जैसे रौबिले दिखने वाले भाईसाहब अचानक सड़क पर पूँछ हिलाते दिखाई देने लगे थे। सत्ता का विटामिन निकलते ही भाईसाहब की प्रतिरोधक क्षमता कम हो गयी थी इससे कोरोना विषाणु को मौक़ा मिल गया और उसने फट्ट से भाईसाहब को अपनी चपेट में ले लिया। किंतु सत्ता जाने का दुःख कोरोना महामारी के प्रकोप से भी अधिक भयंकर था, इसलिए इम्यूनिटी के साथ-साथ भाईसाहब की स्मरण शक्ति भी कमज़ोर हो गई थी, परिणामस्वरूप भाईसाहब को कोरोना का स्मरण ही नहीं रहा, भाईसाहब को साँस लेने में तकलीफ़ होने लगी उन्होंने अपने प्रबल समर्थक पंजालाल पुरोहित से कहा- यार पंजा दम सा घुट रहा है हमारा, ऐसा लगता है जैसे कोई लगातार हमारा गला दबा रहा हो ! 

पंजालाल ने रहस्यमयी दृष्टि से भाईसाहब को देखते हुए रहस्योद्घाटन किया- यह भूत का प्रकोप है भाईसाहब। 

भाईसाहब महाबली थे वे हर दिखाई देने वाली चीज़ को तो चारों खाने चित्त कर सकते थे किंतु ना दिखाई देने वाली शक्ति हो या षड्यंत्र उससे वे भयंकर भयभीत रहते थे भूत सुनते ही बोले- भूत !! तुम कहना क्या चाहते हो पंजा ? 

भाईसाहब, अस्तित्व समाप्त होने के बाद भी जो छाया रूप में बना रहे उसे भूत कहा जाता है। मतलब, कुछ दिनों पहले तक आप मंत्री थे किंतु अब मंत्री नहीं हैं, लेकिन इसके बाद भी मंत्री का स्टेटस ‘भूतपूर्व मंत्री’ बनकर आपकी गाड़ी की तख़्ती से चिपका हुआ है.. यही ‘भूतपूर्व’ आपकी घुटन का कारण है।

पंजालाल देख रहा था की उसकी बात सुनकर भाईसाहब आहत हो गए हैं तो उनको राहत देने के लिए पंजालाल ने आक्रोश मिश्रित सहानुभूति से कहा- घुटन होना स्वाभाविक है भाईसाहब ! किसी दूसरे आदमी के कर-कमलों से गला दबने में उतनी तकलीफ़ नहीं होती जितनी तकलीफ़ किसी अपने आदमी के कर-कमल द्वारा गला दबाए जाने पर होती है। आपके अपने ही आदमी ने आपका गला दबा दिया है। 

पंजालाल से हो रहा वार्तालाप सुनकर भाईसाहब के परममित्र डॉक्टर दिल्ली दयाल दुबे चौकन्ने हो गए कि तभी भाईसाहब ने बहुत धीरे से डॉक्टर दिल्ली की ओर देखते हुए दो बार खाँस दिया दिल्ली ने बिल्ली की फुर्ती से अपने गले में लटके हुए मास्क को अपने मुँह पर फसा लिया और भाईसाहब को शक भरी निगाहों से देखते हुए बोले- भाईसाहब आपको कोरोना है, इसकी जाँच होनी चाहिए। 

पंजालाल ने डपटते हुए कहा- मूर्खतापूर्ण बात मत करो दिल्ली, जाँच कोरोना की नहीं उस षड्यंत्र को होनी चाहिए जिसके कारण अभूतपूर्व भाईसाहब भूतपूर्व हो गए। भाईसाहब को कोरोना हो ही नहीं सकता क्योंकि वो एक राजनीतिक आदमी हैं। 

पंजालाल का अवैज्ञानिक तर्क सुनकर डॉक्टर दिल्ली ने तमक कर कहा- कोरोना का राजनीति से क्या सम्बन्ध ? वो जात-पात, धर्म-घंधा नहीं देखता, वो किसी को भी हो सकता है। 

पंजालाल ने कहा- तुम डॉक्टर हो इसलिए कोरोना के स्वभाव को समझते नहीं हो। कोरोना को समझने के लिए तुमको डॉक्टर नहीं कलेक्टर बनना पड़ेगा, कोरोना प्राणघातक होने के बाद भी मूलतः बहुत धार्मिक प्रवृत्ति का कीटाणु है धर्म-कर्म, तीज-त्योहार में उसकी रुचि है। वो सिर्फ़ वहीं अड्डा जमाता है जहाँ धार्मिक आयोजन होते हैं इसलिए मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, चर्च में जमघट लगाने पर रोक है। कोरोना को राजनीति में बिलकुल रुचि नहीं है और ना ही उसकी चेतना अभी इतनी विकसित हुई है कि वो राजनीति जैसे उत्तम कर्म को समझ सके, इसलिए जहाँ राजनेताओं का जमावड़ा होता है, राजनीतिक गतिविधियाँ या राजनैतिक आयोजन होते हैं वहाँ पर लट्ठ पटक ऐहतियात नहीं बरती जाती। नेता धड़ल्ले से सरकार बना बिगाड़ रहे हैं, एक दूसरे से चिपककर बैठे हैं, पब्लिक के बीच में रहते हैं लेकिन मजाल है कि कोरोना वहाँ पहुँच भी जाए। शराब की दुकान पर बमचक मची, लेकिन कुछ हुआ क्या ? 

कोरोना को सिर्फ़ धार्मिक लोगों की संगत में ही रस मिलता है इसलिए प्रशासन सिर्फ़ धार्मिक आयोजनों में कड़ाई से गाइड लाइन का पालन करता है। डॉक्टर दिल्ली, भाईसाहब उत्तम प्रकृति के राजनेता हैं और रहीमदास जी कहा ही है- 

जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करी सकत कुसंग। चन्दन विष व्यापे नहीं, लिपटे रहत भुजंग॥ 

डॉक्टर दिल्ली ने झिड़कते हुए कहा- बकवास मत करो पंजालाल, मैं दावे से कह सकता हूँ भाईसाहब को कोरोना है। मैं भाईसाहब का चमचा नहीं उनका फ़ैमिली डॉक्टर हूँ उनकी एक-एक खांसी, प्लस, हार्ट बीट को पहचानता हूँ। बिना जाँच करवाए मैं दावे से कह सकता हूँ की भाईसाहब को कोरोना हो गया। 

स्वयं को चमचा कहे जाने से पंजालाल का दिमाग़ भन्ना गया उसने तड़ककर कहा- तू आदमी होते हुए भी ढोर डॉक्टर है। अपनी पत्नी की पल्स तो आज तक पकड़ नहीं पाया और भाईसाहब की नब्ज़ पहचाने की बात करता है ? सरकार पलटने के बाद से जब भाईसाहब अपने कमरे से बाहर ही नहीं निकले तो उनको कोरोना कहाँ से हो जाएगा ? 

भाईसाहब नहीं निकले तो क्या हुआ !! तेरे जैसा चाटुकार चमचा तो चारों तरफ़ लोगों से घूम-घूमकर मिल रहा है, हो सकता है तुम्हीं कहीं से कोरोना उठाकर ले आए हो और भाईसाहब को चिपका दिया हो ? क्योंकि अकेले तुम्हीं हो जो भाईसाहब से चौबीसों घंटे चिपके रहते हो। 

पंजालाल जो भाईसाहब से सटकर बैठा हुआ था अपनी बेज़्ज़ती और अपने ऊपर लगाए जा रहे इस झूठे आरोप से बुरी तरह बिफर गया, उसने लपककर डॉक्टर दिल्ली को अपनी छाती से चिपका लिया और उसके मुँह से मुँह सटाते हुए बोला- तेरा मतलब है कि मुझे कोरोना है और ये मुझसे भाईसाहब को ट्रान्स्फ़र हुआ है ? तो अब ये तुझे भी होना चाहिए क्योंकि तू मेरी बाँहों में है.. और ये कहते हुए पंजालाल ने अपना मुँह डॉक्टर दिल्ली में मुँह से रगड़ना शुरू कर दिया। 

इस अप्रत्याशित चूमाचाटी और गले मिलन से डॉक्टर दिल्ली बुरी तरह घबरा गया, अपने आपको छुड़ाने के लिए उसने पूरी ताक़त से पंजालाल को धक्का दिया, पंजालाल लड़खड़ता हुआ भाईसाहब के ऊपर गिरा। 

भाईसाहब सत्ता चले जाने के बाद से पहले ही अधमरा महसूस कर रहे थे, उनको लगा जैसे ये पंजालाल नहीं, कोरोना का पूरा पहाड़ है जो भाईसाहब को अपनी चपेट में लेकर सदा के लिए उनकी जान लेना चाहता है। भाईसाहब ने पूरी ताक़त से पंजालाल को अपने से दूर फेंक दिया और पास में रखी हुई सेनेटाइज़र की पूरी बोतल अपने ऊपर उड़ेल ली। 

पंजालाल ने स्वयं को कोरोना फ़्री और निर्दोष साबित करने के लिए कहा- ऐसा कुछ नहीं है भाईसाहब मैं पासपोर्ट नहीं राशन कार्ड वाला आदमी हूँ, मैं कहाँ से कोरोना लेकर आऊँगा ? ये पासपोर्टिया हरामख़ोर डॉक्टर दिल्ली मुझसे जलता है इसलिए मेरे राशन कार्ड पर आरोप लगा रहा है। ये जानता है कि पंजा तो आपको छोड़ने से रहा, इसलिए अनर्गल बातें करके आपको भड़का रहा है जिससे आप मुझे संक्रामक बीमारी मानकर खुद ही छोड़ दो..और आपने भी इसकी बातों में आकर मुझे झटक दिया !! भाईसाहब मैं दावे से कह सकता हूँ आप कोरोना के नहीं कपट के शिकार हैं इसलिए आपको साँस लेने में तकलीफ़ हो रही है। 

भाईसाहब प्रखर राजनेता थे वे बहुत अच्छे से जानते थे कि इस एक देश में दो देश हैं एक पासपोर्टयों का और दूसरा राशनकार्डियों का जो गाहेबगाहे एक दूसरे के विरुद्ध मोर्चा खोल लेते हैं। इन दोनों का एक दूसरे के विरुद्ध खड़े रहना ही भाईसाहब के लिए प्राणवायु का काम करता है किंतु इनका यही अंतर्विरोध कभी-कभी ऑक्सिजन में कमी का कारक भी होता है। किंतु सवाल उनके जीवन मृत्यु का है इसलिए इस विषय पर उन्हें पंजा की अपेक्षा दिल्ली के विचार को ही महत्व देना चाहिए। उन्होंने पंजा को झिड़कते हुए दिल्ली से कहा- हाँ दिल्ली तुम बताओ अब मुझे क्या करना चाहिए ? 

दिल्ली ने पंजा की ओर देखते हुए कहा- भाईसाहब सबसे पहले आप इस पंजा को अपने से दूर कीजिए और स्वयं को संघरोध ( कोरंटाइन ) में लेकर आइए। आपकी आधी समस्या तो तुरंत ठीक हो जाएगी। 

भाईसाहब को पंजा बहुत पसंद था लेकिन मरता क्या ना करता, उन्होंने तत्काल पंजालाल से अपना सम्पर्क तोड़ते हुए स्वयं को संघरोध में कर लिया। 

संघरोध में आते ही भाईसाहब कि सारी कमान डॉक्टर दिल्ली दयाल ने अपने हाथों में लेते हुए उनको ऑक्सिजन देते हुए कहा- भाईसाहब सबसे पहले आपको उस संक्रमण से मुक्त करना पड़ेगा जो आपको पंजा से मिला है। अभी तक आपको विदेशी दवाइयों पर भरोसा था लेकिन अब मैं आपका देसी इलाज करूँगा। इसका स्वाद थोड़ा कड़वा ज़रूर होता है लेकिन यदि आप इसे बर्दाश्त कर गए तो आपका कायाकल्प होना पक्का है। अब से आपको चौबीसों घंटे अपने मुँह पर मुखौटा, मेरा मतलब है मास्क लगाकर रखना है, जिससे भी बात करनी है मास्क पहनकर करिए साथ ही आपको प्रणाम करने की आदत डालनी होगी, ध्यान रहे आपको व्यक्तियों से सटकर उनकी बराबरी से नहीं बैठना है। क्योंकि जिस वायरस से आप पीड़ित हैं वो इतना घातक है कि वो सिर्फ़ आपके लिए ही नहीं, आपके सम्पर्क में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए जानलेवा हो सकता है इसलिए अब आप संसार की चिंता छोड़कर सिर्फ़ स्वयं के जान-मान की रक्षा करें। 

संघरोध की यह पहली रात थी भाईसाहब को मुश्किल से नींद आयी ही थी कि उनके स्वप्न में पंजालाल आकर खड़ा हो गया वो उसने कह रहा था- भाईसाहब कोरोना वायरस से तो सिर्फ़ जान जाने का ख़तरा है लेकिन ये जो आज आपने मुझ पंजा के साथ किया है इससे आपके मान जाने की सम्भावना प्रबल हो गयी है, ध्यान रखिए भाईसाहब जो व्यक्ति अपनी जान की रक्षा के लिए अपने मान का त्याग करता है वह जीवित रहते हुए भी घुटन महसूस करता है। आप भले ही कोरोना फ़्री हो जाएँ लेकिन आप घुटन फ़्री नहीं हो सकते। 

भाईसाहब ने आँखें तरेर कर पंजा को देखा और धमकाते हुए बोले- पंजा यदि तूने एक शब्द और मुँह से निकाला तो मैं तुझे पटककर मारूँगा। याद रख मैं अभी ज़िंदा हूँ। 

पंजालाल ने ठहाका लगाते हुए कहा- आप ज़िंदा ही तो नहीं हैं भाईसाहब, तभी तो आपको अपने ज़िंदा होने की घोषणा करनी पड़ रही है। भाईसाहब कोरोना से तो आप मास्क पहनकर बच सकते हैं लेकिन जिस बीमारी से आप ग्रस्त हैं उससे आपको मास्क नहीं मुखौटा ही बचा सकता है, ये कहते हुए पंजालाल ने टाइगर का एक मुखौटा निकालकर भाईसाहब के मुँह पर लगा दिया और खिलखिलाते हुए भाईसाहब देखकर बहुत ज़ोर से बोला- टाइगर अभी ज़िंदा है।

पंजा की इस हरकत से चिढ़कर भाईसाहब ने हुंकारते हुए अपने मज़बूत पंजे से पंजा की गर्दन दबोच ली, पंजा चीखने लगा पंजा को चीखता देख भाईसाहब हड़बड़ा के उठ बैठे.. उन्होंने देखा कि उनका पंजा-पंजालाल की गर्दन पर नहीं था बल्कि वे अपने ही हाथ से अपनी गर्दन दबा रहे थे !

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