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गांधी एक व्यक्ति नही ,दर्शन है -डॉ अर्जुन पांडेय

Friday, October 2, 2020

/ by Editor

हरिकेश यादव-संवाददाता (इंडेविन टाइम्स)

अमेठी। 

मोहन दास करमचन्द गांधी ने बिदेश में भारतीयों की उपेक्षा से कुन्ठित हुए। और इस कलंक को मिटाने के लिए देश में कुरीतियों के खिलाफ जंग छेडी। गांधी के सरल, सरस, उच्च बिचार धारा ने सबको समेट कर रक्षा सूत्र में देश को बांध लिया। देश को गुलामी से मुक्ति दिलाये। और राष्ट्र पिता कहलाये। आज कोई हार मनता है। तो महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष धरने पर बैठ कर सत्य की अलख जगाता है। सत्याग्रह आज भी न्याय की मूर्ति बनीं हुईं हैं।                           

महात्मा गांधी जी के उच्च आदर्शों सत्य, अहिंसा, अटूट देश प्रेम, स्वावलंबन व सेवाभाव एवं सादगी को नैतिकता का प्रतिमान मानकर उनके विचारों का वरण किया जाए तो निःसन्देह नैतिकता के उच्च मापदंड पर देश पराकाष्ठा को प्राप्त कर सकता है। गांधी जी के जीवन मूल्य हमें मानवता की ओर ले जाते हैं| बचपन से लेकर जीवन के अंतिम क्षण तक गांधी जी के अनेक रूप देखने को मिलते हैं। गांधी जी अफ्रीका से लौटने के बाद बिहार के चंपारण में देश की गरीबी को देखने के बाद लाठी और लंगोटी को अपनाया। मैनचेस्टर के लूट को रोकने के लिए चरखे को अपनाया उनका मानना था कि ग्राम स्वराज से ही हिन्द स्वराज का रास्ता खुल सकता है।दौर बदला, दशकों गुजर चले| आज भी सारी दुनियाँ उसी गांधी को ढूँढ़ रही है| कोई तश्वीर में, कोई नैतिकता में, कोई चरित्र में, कोई व्यवहार में, कोई पुस्तकों में तो कोई बीते वक्त के आईने में। यह पूरी दुनियाँ के लिए आश्चर्य का विषय बना हुआ है कि जैसे-जैसे वक्त बीतता जा रहा है, गांधी की प्रासंगिकता बढ़ती जा रही है। गांधी केवल व्यक्ति नहीं, एक दर्शन हैं।गांधी जी की माँ की शिक्षा, धर्मपत्नी कस्तूरबा जी का अप्रतिम सहयोग एवं जनमानस का उनके प्रति लगाव गांधी दर्शन को बल प्रदान करता है। गांधी जी ने हरिश्चंद्र के नाटक से सत्य एवं श्रवण की पितृभक्ति से जो शिक्षा प्राप्त की, उसका जीवनभर अनुपालन करते रहे। महात्मा गांधी, गोपालकृष्ण गोखले एवं आचार्य विनोवा भावे को अपना आदर्श मानते थे। आज इक्कीसवीं सदी में कार्ल मार्क्स के स्थान पर महात्मा गांधी को दुनिया के देश एक नम्बर पर रखने के लिए तैयार हैं| वर्तमान में भारत की अस्मिता को गांधी का दर्शन ही बचा सकता है।आज सारी दुनिया मानवता के पुजारी को नमन करने के लिए तैयार है।

(फोटो-डॉ अर्जुन पांडेय)



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