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जानिए कैंसर की ए बी सी डी - निखिलेश मिश्रा

Thursday, October 22, 2020

/ by Dr Pradeep Dwivedi

 

निखिलेश मिश्रा, लखनऊ


कैंसर सभी के शरीर मे होता है लेकिन हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता उसे नष्ट करती रहती है अर्थात खराब कोशिकाएं ही कैंसर है जो तभी हावी हो जाती है जब शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता या श्वेत रुधिर कणिकाएं कमजोर होने लगती हैं। परिणामतः खराब कोशिकाओं का बंच इकट्ठा होने लगता है जिसे आमतौर पर कैंसर कहा जाता है।

एक ओर जहां कैंसर से ग्रसित अंग का टुकड़ा काटकर १५ दिन की बायोप्सी परीक्षण के उपरांत कैंसर की उपस्थिति ज्ञात हो पाती है वहीं दूसरी ओर कुछ महानुभाव इसके उपचार हेतु अजीबो गरीब दावे भी करते नजर आते हैं।

निश्चित रूप से प्राचीन भारतीय ज्ञान चाहे ज्योतिष हो या आयुर्वेद बड़े ही विकसित एवं अकाट्य रहे हैं। पतंजलि, चरक, सुश्रुत आदि विद्वानों ने इस क्षेत्र में बड़े शोध किये और कई रोगों का सफल उपचार भी किया किन्तु आज के समय के लोग यदि उनके समकक्ष ज्ञानी अथवा सिद्धपुरुष होने का दावा करें तो यह कतई विश्वनीय नही जान पड़ता है अन्यथा आज मेडिकल साइंस इन पर रिसर्च कर चुकी होती। हमारी प्राचीन धरोहर को पूर्णतः प्राप्त करने का सामर्थ्य आज सहज नही है।

एक गंभीर रोग के मरीजों को समय रहते सही इलाज शुरू कराने के बजाय अपने पाखण्ड का हिस्सा बनाकर धन ऐंठने वाले लोग जेल भेजे जाने योग्य है। लोगो को मिसगाइड कर के उनकी अमूल्य जिंदगी नष्ट कर धन कमाने वाले कतई क्षम्य नही हैं।

आज कैंसर जैसे असाध्य रोग का इलाज संभव है लेकिन यह भी सत्य है कि ठीक होने के बाद भी इसके पुनः वापस आने के आमतौर पर ७% चांसेस हमेशा बने रहते हैं। ब्लड में कौन सा सम्वेदनशील पार्टिकल कब मिला है, कितना मिला है याफिर मिला है या नही मिला है का पता आज की मेडिकल साइंस किसी भी जांच से नही लगा पाती। इसका पता तब लगता है जब शरीर के किसी भाग में कोई गांठ या कोई असमान्य लक्षण पहली बार नजर आ जाता है। तभी आधुनिक जांचे शरीर मे कैंसर होने या ना होने की पुष्टि भी कर पाती हैं।


सामान्यतः इसके इलाज की ४ विधियां है-

(१) सर्जरी

(२) कीमोथेरेपी

(३) रेडिएशन

(४) इम्यूनोथेरेपी

चौथा प्रकार नया है और कितना कारगर है मैं नही जानता क्योंकि इसे हमारे यहां प्रमोट नही किया जा रहा है लेकिन ऊपर से शेष ३ विधियों द्वारा कैंसर का उपचार किया जाता है। पूरा उपचार इनमे से किसी एक विधि द्वारा भी किया जा सकता है याफिर तीनो विधियों के साथ द्वारा भी। यदि तीनो के एकसाथ प्रयोग की बात करें तो हम सामान्य तौर पर जानते हैं कि पहले सर्जरी होती है फिर कीमो दिया जाता है और फिर रेडिएशन। 

कई बार जब सर्जरी सम्भव ना हो याफिर गांठ का साइज काफी बड़ा हो तब कैंसर के फैलाव को वही उसकी जगह रोकने के लिए याफिर सर्जरी के लिए उसके पूर्व गांठ को सिकोड़ने के लिए कीमो दी जाती है ततपश्चात सर्जरी की जा सकती है। कई बार तो कीमो थेरेपी या रेडियोथेरेपी याफिर इनदोनो से भी इसका उपचार हो जाता है, सर्जरी की आवश्यकता भी नही पड़ती।

यदि फैलाव एक हिस्से से शरीर के अन्य हिस्सों तक चला जाय जैसे फेफड़े, हृदय, ब्रेन, बोन, ब्लड इत्यादि तब सर्जरी कठिन हो जाती है, आमतौर पर इसे स्टेज ४ का कैंसर कहा जाता है। ऐसी स्थिति में केवल कीमो या रेडिएशन ही एकमात्र विकल्प बचता है। इसके अतिरिक्त कैंसर सेल्स बढ़ने की गति भी होती है जो ग्रेड १, २, और ३ होती है। सामान्य तौर पर सबसे कम गति ग्रेड १ की और अबसे तेज गति का अर्थ ग्रेड ३ लिया जाता है। ग्रेड ३ का मतलब तीव्रतम(अग्रेसिव) गति।

भले ही ठीक हुए रोगियों के लिए ७% रिस्क आजीवन रहता है किंतु आज मेडिकल साइंस ने बहुत तरक्की कर ली है। समय पर इलाज शुरू हो जाये तो इसे पूरी तरह निपटा जा सकता है।

मित्रों से इतना अवश्य कहूंगा कि किसी बाबा और स्वघोषित वैज्ञानिक के चक्कर मे फंस कर अपने मरीज की स्थिति कतई ना बिगाड़े। सीधे कैंसर सर्जन से मिले और रेगुलर इलाज शुरू कराएं। यही प्रमाणित है और यही पूर्णतः विस्वसनीय हैं। बाकी लोगो की राय का अनुपालन बिना अपने सर्जन की सलाह के कतई ना करें। 

आज कैंसर लाइलाज नही है बशर्ते सही समय पर उपचार शुरू हो जाय, रही बात ७% वापस आने की गुंजाइश की तो दुनियां में भगवान का अस्तित्व आज डॉक्टर भी स्वीकार करते हैं। इलाज सिर्फ वही कराये जो प्रामाणिक हो। भ्रामक लोगो से बचें। फोड़े को कैंसर का नाम देकर दो मीठी गोली से फोड़ने वाला कैंसर सर्जन नही हो सकता। कैंसर और फोड़े में फर्क होता है। दुष्प्रचार से बचिए।

इसी क्रम में इस एक नई विधा "इम्यूनोथेरेपी" पर चर्चा करना भी आवश्यक प्रतीत हो रहा है।

आवश्यक है कि भारत के मेडिकल कलेजेस के ऑन्कोलॉजी सिलेबस में सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के साथ साथ "डेण्ड्रेटिक सेल थेरेपी अर्थात इम्यूनोथेरेपी" भी जोड़ी जाए। 

आज भारत मे यह "डेण्ड्रेटिक सेल इम्यूनोथेरेपी" कही भी नही है। अमेरिका और यूरोप में यह थेरेपी बहुत कारगर सिद्ध हुई है और यह सिर्फ वहीं उपलब्ध भी है जिसका तीन माह का खर्च लगभग ४५ लाख रूपये आता है।

यह कोर्स शुरू होने के बाद आज यहां भारत मे रहकर भी अमेरिका से वे डेवलप्ड इंजेक्शन आ जाते हैं जिसे हर १५ दिन में मरीज को लेना पड़ता है किन्तु यदि आवश्यक ही हो जाय तो अमेरिका जाकर भी यह इलाज कराया जा सकता है।

दरअसल इस विधा के अंतर्गत जब मरीज का कीमो चढ़ रहा होता है तब उसके २१ दिन के सायकल के दौरान ही इम्यूनोथेरेपी के ये डेवलप्ड इंजेक्शंस भी साथ साथ लेने होते है। इसमें मरीज के शरीर से ब्लड लेकर उसमे से WBC यानी श्वेत रुधिर कणिकाएं अलग करते हुए कैंसर सेल्स से लड़ने लायक डेवेलोप किया जाता है। ततपश्चात उसे मरीज के शरीर मे पुनः इंजेक्ट कर दिया जाता है।

हमारे शरीर मे रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए WBC उत्तरदायी होती है। कैंसर हमसभी के शरीर मे होता है। कैंसर का अर्थ है खराब कोशिकाएं। हमारे शरीर मे अच्छी कोशिकाओं के साथ खराब कोशिकाएं भी बनती रहती है। इन खराब कोशिकाओं को WBC नष्ट करती रहती है किंतु WBC जब यह करने में असमर्थ सिध्द हो जाती है या कमजोर सिद्ध होती है तब हमारे शरीर मे इन खराब कोशिकाओं का बंच इकट्ठा होने लगता है जिसे कैंसर कहते हैं।

इम्यूनोथेरेपी या डेण्ड्रेटिक सेल थेरेपी WBC को पुनः मजबूत कर के खराब कोशिकाओं से लड़ सकने में समर्थ बनाने की विधा है जो आज भारत मे सम्भवतः कही भी नही है जबकि अमेरिका की मेडिकल साइंस में यह खूब फल फूल रही है। डेण्ड्रेटिक सेल इम्यूनोथेरेपी के सम्बंध में यहां भारत मे केवल एक दो डॉक्टर्स के बारे में ही मैंने सुना है किंतु उनका इम्यूनोथेरेपी कितना कारगर है, यह अभी मैं ठीक ठीक नही जानता।

रही बात रिकवरी और क्योर होने की, इस सम्बन्ध में बताना चाहूंगा कि बताया जाता है कि स्टेज ४ के भी ३०% मरीज इस थेरेपी से लाभान्वित हो जाते है और उनकी लाइफ काफी हद तक बढ़ जाती है जबकि स्टेज १, २, ३ के परिणाम तो इम्यूनोथेरेपी की ९०% तक सफलता का आंकड़ा बताते हैं।

स्टेज ४ का अर्थ है शरीर के एक हिस्से से अन्य हिस्सों तक कैंसर सेल्स का फैल जाना। तब सर्जरी की उम्मीद लगभग ना के बराबर ही होती है।

इस थेरेपी के अंतर्गत एक विशेष ठंडे तापमान पर डेवलप्ड लाइव सेल्स(विकसित जीवित कोशिकाएं) ट्यूब में रखकर मरीज तक पंहुचा दी जाती है जिसे वह किसी अच्छे अस्पताल में इंजेक्ट करवा सकता है।


उपरोक्त जानकारी मैंने अपनी सामान्य समझ के अनुसार लिखी है। आपके सुझाव का सहर्ष स्वागत हैं।

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