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चरण कमल वंदउं मां तोरे - त्रयंबकेश्वर त्रिवेदी "सुनीलजी"

Saturday, October 24, 2020

/ by Dr Pradeep Dwivedi

लेखक - त्रयंबकेश्वर त्रिवेदी "सुनीलजी"

(स्व.पत्रकार अ.गीतकार लो. रंगकर्मी) 

चरण   कमल    वंदउं   मां  तोरे ।

अवगुण   सारे   हर   मां   मोरे  ।।

चरण   कमल ...२ ...२ ...२ ... ।।

भारत की सरस्वती  तू , मैय्या कहलाती है।

भक्तों का  ज्ञान बढ़ा,  भव पार लगाती है।।

जब भक्त पुकारे मां, चढ्.,  हंस पे आती है।

मां ज्ञान कि ज्योति जगा,क्यों देर लगाती है।।

विनती करउं मां दोउ कर जोरे ।

चरण  कमल ...२...२....२... ।।

हम तेरे  चरणों में , मां  शीश झुकाते हैं।

मां कृपा दृष्टि करदे, तेरे प्यार के प्यासे हैं।।

आ जल्दी आ जा मां, हम तुझे बुलाते हैं।

वर दे वर दायिनी मां, कर जोर मनाते हैं।।

ज्ञान  बढ़य ,  सत्कर्म  करों   रे ।

चरण  कमल ....२ ....२ ....२ ।।

चढ़ हंस पे आ जा मां, वीणा को बजा जा मां।

संकल्प  किया जो है, सब  पूर्ण करा जा मां।।

पितु मातु अग्रजों को, सुख शांति दिला जा मां।

मरने के बाद  जिएं, शुभ कर्म करा  जा  मां।।

पड़ा     रहूं    चरणन  मां  तोरे ।

चरण  कमल ....२ ....२ ....२ ।।

जग में जिंदा रहकर, कुछ कर दिखलाऊं मां।

सन्मार्ग  गहें परिजन , उत्कर्ष को पाऊं मां।।

कहिं रहूं  करूं कुछ भी, ना ध्यान हटाऊं मां।

स्वजनों संग रहकर भी, गुणगान ही गांऊं मां।।

हों  सब  सुखी, शांति जग हो  रे।

चरण  कमल ....२ ....२ ....२ ।।

चरण  कमल   बन्दउं  मां  तोरे ।

अवगुण   सारे   हर   मां   मोरे ।।

चरण  कमल ....२ ....२ ....२ ।। 


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