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नारी शक्ति, साहस की पहचान - अन्जनी अग्रवाल 'ओजस्वी'

Thursday, October 22, 2020

/ by Dr Pradeep Dwivedi

अन्जनी अग्रवाल 'ओजस्वी'

कानपुर नगर

नारी शक्ति, साहस की पहचान

ये ही,  असीमित स्रोत है।।

वेदना संवेदना के सागर में।

न केवल ,व्यथित ह्रदय की पीड़ा।।

नारी ही तो,  बन जननी।

देती जन्म , पुरुष को वो।।

सहधर्मिणी बन, निभाती साथ।

एक आह भी ,न लाती साथ।।

बन माता ,करती दुलार।

बिन भेद ,देती सभी को प्यार।।

देव भी ,उसकी शरण मे ।

आकर , पाते मोक्ष  है ।।

पिला ,संस्कार की धुट्टी।

न करे, किसी दिन छुट्टी।।

अधिकारों खातिर, न लड़ती ।

जबकि पाती, जीवन घुड़की।।

जागो नारी,  जागो अब ।

जीवन को,  करो दीप्त।।

करो ,कर्तव्यों को उजागर।

संस्कारों का, तो तुम सागर।।

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