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क्या है अलौकिक प्रेम का अर्थ - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

Friday, October 9, 2020

/ by Dr Pradeep Dwivedi
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज


 शुद्ध वस्तु से जो अशुद्ध वस्तु प्यार करेगी तो वो शुद्ध हो जायेगी । वो किसी भी भाव से प्यार करे । और अगर वो अशुद्ध वस्तु से प्यार करती है तो चाहे जो भाव हो , उसका परिणाम अशुद्ध ही मिलेगा ।

कृष्ण भक्तः सकामोऽपि वरोऽन्य सेवकात्खलु ।

निष्कामादपि तत्कामो यतो मोक्षाय कल्पते ।।

शुद्ध वस्तु का प्यार करने वाला सकाम भी हो तो गोलोक जायेगा और संसार से कोई निष्काम प्रेम भी करे तो भी संसार मिलेगा । चौरासी लाख योनियाँ मिलेंगी उसी में आओ - जाओ । अरे ! अनन्त बाप बनाये हम लोगों ने , अनन्त माँ बनाई , अनन्त बेटा - बेटी बनाये , अनन्त स्त्री - पति बनाये , हर जन्म में बनाते ही हैं , कहाँ है वो ? बड़ी - बड़ी डींग हाँकते थे - ये हमारा बेटा है , ये हमारी बीबी है , ये हमारी माँ है । काहे की बीबी , बेटा , माँ । सब मर गये , अपने - अपने कर्म के अनुसार गये । एक नरक गया , एक स्वर्ग गया , एक मृत्युलोक में आया , वो किसी का बेटा बना , वो किसी की बीबी बनी फिर दुबारा । केवल भगवान् का नाता ही ऐसा नाता है जो सनातन है और सब नाते क्षणिक हैं , नश्वर हैं । उसका परिणाम दुःख है , वर्तमान में भी और भविष्य में भी ।

एक बाप एक बेटे से कहता है , कि बेटा ! पानी पिला दे और बेटा दौड़कर जाता है , तो बाप कहता है, ' शाबाश ! कितना बढ़िया  बेटा है हमारा , हम तो बड़े लकी हैं । ' दस मिनट बाद फिर दोबारा बाप कहता है बेटे से, ' जरा चश्मा ला दे ' । वो नहीं उठता । ' मैंने कहा वो मेज पर चश्मा रखा है ला दे । ' फिर भी नहीं उठा । ' राक्षस पैदा हुआ है । ' लो ! अभी श्रवण कुमार था , अभी राक्षस हो गया ।

संसार वालाें का काम कर दो , उनकी गुलामी कर दो , तो आप बड़े अच्छे हो । बीबी बड़ी अच्छी , बाप बड़ा अच्छा , माँ बड़ी अच्छी । काम न करो उनका तो सब बुरे हैं ,गोलियाँ चल जाती है , जहर दे देते हैं एक दूसरे को , मर्डर कर देते हैं , तलाक दे देते हैं , ये सब संसार में होता है  । और दावा ये करते हैं लोग कि बेटा ! हम तुमसे प्यार करते हैं । प्यार ! तुम प्यार शब्द का अर्थ नहीं जानते हो , क्या प्यार करोगे । तुम क्या जानो , प्यार क्या होता है ।

' प्यार ' तो अलौकिक वस्तु है । ये भगवान् और महापुरुष के पास है । तुम तो प्यार के भूखे हो , भिखारी हो । बाप से प्यार माँग रहे हो , माँ से प्यार माँग रहे हो , बीबी से माँग रहे हो , बेटे से माँग रहे हो । तुम क्या प्यार दोगे किसी को ? जिसको आनन्द अभी मिला ही नहीं है , दूसरे को क्या देगा वो ? एक गरीब एनाउंस कर दे कि जो व्यक्ति जो माँगेंगा हम देंगे , कल सबेरे आ जाय । भीड़ इकट्ठी हो जायेगी । वो कह देगा मेरे पास जो है वो ले लो । क्या है ? कुछ नहीं है। तुमने तो एनाउंस किया था जो माँगेगा । हाँ - हाँ तो जो मेरे पास है वो माँगो , हम दे देंगे । कुछ है ही नहीं मेरे पास , तो हम क्या देंगे । हाँ , सब भिखारी हैं आनन्द के , प्रेम के और वह है नहीं किसी के पास । धोखा सबको है । एक दूसरे से माँग रहे हैं । अनेक चार सौ बीस करके उसको बेवकूफ बना रहे हैं , लेकिन वो बेचारा क्या देगा ? है ही नहीं उसके पास , वो तो तुमसे सुख चाहता है।

गोपियों का प्रेम शुद्ध पर्सनैलिटी के प्रति था , इसलिये उनको शुद्ध फल मिला।


पुस्तक :- प्रश्नोत्तरी ( भाग २ )

पृष्ठ संख्या :- १७१ , १७२ एवं १७३ 

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