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मेरे गाँव की पगडंडियाँ - कुसुम सिंह लता

Monday, October 26, 2020

/ by Dr Pradeep Dwivedi

कुसुम सिंह लता

शेखपुरा बिहार

व्याल - सी  बलखाती  है,

मेरे  गाँव  की पगडंडियाँ,

पवन   संग   है   डोलती,

धान  की  पकी  बालियां।


वसुधा  का  वस्त्र स्वर्णिम,

चहुँ      दिशा      शोभती,

कृषक  गण अति  हर्षित,

लक्ष्मी      पग    गुँजती ।


सूर्य   की  पहली  किरण,

पनघट      घट     चूमती,

भोर   की   पावस  बयार,

धरा       अंग    पुलकती।


थिरक   रही   चहूँ   ओर,

युवातियाँ   की   मस्तियाँ,

पग   में    पाज़ेब    पहन ,

सखी   संग  गलवाहियाँ।


हाथों   में   रचेगी  मेहंदी,

सुकुमार   तन    हल्दियाँ,

शहनाई    संग     गूंजेगी,

परिणय    की    वेदियाँ।

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