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देसी कोरोना वैक्सीन को जल्द मिल सकती है तीसरे चरण के ट्रायल की इजाजत

Saturday, October 10, 2020

/ by Editor

 नई दिल्ली

दुनियाभर के देश कोरोना वैक्सीन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। भारत समेत कई देशों में तेजी से वैक्सीन का काम भी चल रहा है। लाखों लोगों पर वैक्सीन का ट्रायल चल रहा है। हालांकि किसी वैक्सीन को अब तक ग्लोबल अप्रूवल नहीं मिला है। रूस और चीन में लोगों के एक्सपेरिमेंट के तौर पर वैक्सीन देना शुरू किया गया है। दुनियाभर में 9 वैक्सीनऐसी हैं जिनके तीसरे चरण का ट्रायल या तो शुरू हो गया है या फिर शुरू होने वाला है।
ट्रायल में शामिल होंगे 28,500 लोग
भारत बायोटेक की 'कोवैक्सीन' का भी तीसरे चरण का ट्रायल शुरू हो सकता है। उसने DCGI से तीसरे चरण के लिए मंजूरी मांगी है। डीसीजीआई ने दूसरे चरण के डेटा मांगे हैं जिससे की तीसरे चरण की मंजूरी दी जा सके। भारत बायोटेक ICMR के साथ मिलकर वैक्सीन पर काम कर रहा है जिसका नाम 'कोवैक्सीन' है। अधिकारियों के अनुसार, हैदराबाद स्थित टीका निर्माता ने दो अक्टूबर को डीसीजीआई को आवेदन देकर अपने टीके के तीसरे चरण के लिए परीक्षण की अनुमति मांगी थी। कंपनी ने अपने आवेदन में कहा है कि इस अध्ययन में 18 साल या उससे ज्यादा उम्र के 28,500 लोगों को शामिल किया जाएगा और यह परीक्षण 10 राज्यों के 19 जगहों पर किया जाएगा।

कहां-कहां होगा ट्रायल
इन जगहों में दिल्ली, मुंबई, पटना और लखनऊ शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, ‘कोवैक्सीन’ टीका के दूसरे चरण का परीक्षण चल रहा है और कुछ स्थानों पर स्वयंसेवियों को दूसरी खुराक अभी नहीं दी गई है। एक अधिकारी ने बताया कि कंपनी ने पहले और दूसरे चरण के ट्रायल के अंतरिम आंकड़ों के साथ तीसरे चरण के परीक्षण के लिए ‘प्रोटोकॉल’ पेश किया। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की विशेषज्ञ समिति (SECS) ने पांच अक्टूबर को आवेदन पर विचार-विमर्श किया। समिति ने विस्तृत विचार-विमर्श के बाद कहा कि तीसरे चरण के अध्ययन का डिजाइन सिद्धांत रूप में संतोषजनक है, सिवाय बिना लक्षण वाले की परिभाषा पर स्पष्टीकरण के।

इन बातों का रखा गया ध्यान
समिति ने अपनी सिफारिशों में कहा है कि दूसरे चरण के परीक्षण के सुरक्षा और प्रतिरक्षा संबंधी आंकड़ों के आधार पर पहचानी गई उचित खुराक के साथ अध्ययन शुरू किया जाना चाहिए। इस प्रकार कंपनी को ऐसे संबंधित आंकड़े पेश करने चाहिए। एक स्रोत ने कहा कि समिति ने अपनी चर्चा के दौरान यह भी गौर किया कि सभी समूहों ने टीका की खुराक को अच्छी तरह से सहन किया और अब तक कोई गंभीर प्रतिकूल घटना सामने नहीं आयी है। उन्होंने कहा कि आम तौर पर इंजेक्शन लगाए जाने के स्थान पर दर्द की शिकायत सामने आई जिसका हल निकाल लिया गया है।

वैक्सीन की रेस में कौन आगे?
अमेरिकी दवा कंपनी फाइजर ने जर्मनी की बायोएनटेक के साथ मिलकर जो वैक्‍सीन तैयार की है, उसके शुरुआती डेटा का एनालिसिस अगले दो महीने में होगा। इसी दौरान मॉडर्ना की वैक्‍सीन के डेटा का भी रिव्‍यू होगा। ऑक्‍सफर्ड यूनिवर्सिटी और अस्‍त्राजेनेका की वैक्‍सीन भी फाइनल स्‍टेज में है। जॉनसन ऐंड जॉनसन की वैक्‍सीन भी ज्‍यादा पीछे नहीं है। चीन की तीन वैक्‍सीन फेज 3 ट्रायल में हैं लेकिन ग्‍लोबली उनपर कोई देश पक्‍का भरोसा नहीं कर रहा।

कब तक मिलेगी वैक्सीन को मंजूरी?
वैक्‍सीन के ट्रायल्‍स का डेटा रेगुलेटर्स के पास जाएगा। अमेरिका समेत कई पश्चिमी देशों के वैक्‍सीन रेगुलेटर्स ने कहा है कि वैक्‍सीन की सेफ्टी सुनिश्चित करने के बाद ही अप्रूवल होगा। फाइजर-बायोएनटेक ने कहा है कि उसे इस महीने पता लग जाएगा कि उसकर वैक्‍सीन कितनी असरदार है। मॉडर्ना का डेटा अगले महीने तक आने की संभावना है। अस्‍त्राजेनेका ने भी अगले दो महीने में डेटा रिव्‍यू की बात कही है। अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम ने कहा है कि वे रिव्‍यू प्रोसस तेज करेंगे ताकि इमर्जेंसी यूज के लिए अप्रूवल दिया जा सके। यानी इस साल के अंत तक कोई वैक्‍सीन अप्रूव हो सकती है।

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