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सचिवालय के सहायक समीक्षा अधिकारी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी, बर्खास्त सिपाही पर 25 हजार रुपए का इनाम

Saturday, October 10, 2020

/ by Editor

 लखनऊ

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पशुपालन विभाग में 214 करोड़ रुपए का फर्जी टेंडर दिलाने के मामले में चल रही जांच में कोर्ट ने सहायक समीक्षा अधिकारी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है। वहीं, फरार चल रहे बर्खास्त सिपाही दिल बहादुर के खिलाफ 25 हजार इनाम घोषित किया गया है। एसीपी गोमतीनगर ने बताया कि मामले में अन्य लोगों के शामिल होने की जांच की जा रही है।

बीते बुधवार को हाईकोर्ट की लखनऊ खण्डपीठ ने अभियुक्त आईपीएस अधिकारी अरविंद सेन के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने तीन हफ्ते में अग्रिम जमानत अर्जी पेश करने की इजाजत देते हुए इस बीच उनके खिलाफ तीन हफ्ते तक कोई उत्पीड़न की कार्रवाई किए जाने पर रोक भी लगा दी थी।

पशुपालन विभाग में फर्जीवाड़ा उत्तर प्रदेश सचिवालय के सहायक समीक्षा अधिकारी उमेश कुमार मिश्र के खिलाफ हाईकोर्ट से मिला स्टे खारिज करते हुए गैर जमानती वारंट जारी किया है। इसके बाद से लगातार एसटीएफ की टीम में उमेश की तलाश शुरू कर दी है। वहीं, फर्जीवाड़े में शामिल बर्खास्त सिपाही दिल बहादुर यादव पर 25 हजार का इनाम घोषित किया गया है। पुलिस बर्खास्त सिपाही की भी तलाश की जा रही है।

क्या था मामला
साल 2018 में पशुधन घोटाले की पोल तब खुली थी, जब इंदौर के व्यापारी मंजीत सिंह भाटिया ने लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली में मुकदमा दर्ज करवाया था। पीड़ित ने आरोप लगाया था कि पशुधन विभाग में 214 करोड़ के टेंडर देने के एवज में तीन फीसदी कमीशन का प्रस्ताव मिला था। जिस पर एक फीसदी कमीशन के तौर पर एक करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया था।

आरोप है कि 31 अगस्त को उसे फिर बुलाया गया और पशुपालन विभाग के विधानसभा सचिवालय स्थित सरकारी कार्यालय में आशीष राय ने खुद को एस के मित्तल बताकर उससे मुलाकात की और फर्जी वर्क ऑर्डर की कापी से दी। फिर उससे कई बार करोड़ों रुपए वसूले गए। एसटीएफ की जांच में इंदौर के एक व्यापारी से पशुपालन विभाग में फर्जी टेंडर के नाम पर 9 करोड़ 72 लाख रुपए हड़पने का मामला पकड़ा था।

इस पूरे फर्जीवाड़े में पशुधन राज्य मंत्री के प्रधान निजी सचिव रजनीश दीक्षित, सचिवालय के संविदा कर्मी और मंत्री का निजी सचिव धीरज कुमार देव, कथित पत्रकार एके राजीव, अनिल राय और खुद को पशुधन विभाग का उपनिदेशक बताने वाला आशीष राय शामिल थे। मुख्य साजिशकर्ता आशीष राय ही पशुपालन विभाग के उपनिदेशक एसके मित्तल का कार्यालय का इस्तेमाल किया खुद उपनिदेशक बना था।

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