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चीन के बड़बोलेपन पर भारत के विदेश मंत्रालय का सीधा और साफ संदेश, कहा- हमारे आंतरिक मामलों से रहें दूर

Thursday, October 15, 2020

/ by Editor

 नई दिल्ली

भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में जारी तनातनी की स्थितियों के बीच केंद्र सरकार के विदेश मंत्रालय ने चीनी सरकार को दो टूक संदेश दिया है। चीन की ओर से लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के फैसले को अवैध बताने पर भारत ने कहा है कि चीन को हिंदुस्तान के आंतरिक मसलों में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है। चीन के बयान के अगले ही दिन दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा है कि लद्दाख, जम्मू-कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश भारत के अभिन्न अंग हैं। इनके विषय में चीन को बोलने का कोई भी अधिकार नहीं है।


दिल्ली में विदेश मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, लद्दाख और जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न अंग हैं और हमेशा रहेंगे। चीन को हिंदुस्तान के आंतरिक मामलों में बोलने का कोई भी अधिकार नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि अरुणाचल प्रदेश भी भारत का अभिन्न अंग है। इस बात को सीधे शब्दों में चीन को कई बार बताया जा चुका है और ये संदेश चीनी सरकार के उच्चतम स्तरों तक भी पहुंचाया गया है।

लद्दाख में निर्माण और इसे केंद्र शासित प्रदेश बनाने का विरोध
पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच जारी विवादित स्थिति के बीच चीनी सरकार ने हाल ही में लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश के रूप में हुए पुनर्गठन को गलत बताया था। चीन की ओर से इस संबंध में दिए गए बयान में कहा गया था कि भारत ने गैरकानूनी तरीकों का इस्तेमाल कर लद्दाख को एक केंद्र शासित प्रदेश बनाया है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता झाओ लिजिन ने अपनी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लद्दाख में भारत सरकार की ओर से तमाम पुलों और सुरंगों के निर्माण का भी विरोध किया था।

'सामरिक मजबूती और सुरक्षा के लिए कर रहे निर्माण'
भारत सरकार ने इसे लेकर भी गुरुवार को अपना पक्ष रखा। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि सरकार का पूरा ध्यान देश में इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और लोगों के आर्थिक विकास पर है। इसके लिए सरकार ने तमाम नीतियां बनाई हैं और सीमांत इलाकों में विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है। ऐसा इसलिए भी किया जा रहा है जिससे कि भारत की सामरिक और सुरक्षात्मक जरूरतों की स्थिति में देश का पक्ष और मजबूत बन सके।

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