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मौन की गूंज - अतुल पाठक "धैर्य"

Sunday, November 1, 2020

/ by Dr Pradeep Dwivedi

अतुल पाठक "धैर्य"

जनपद हाथरस (उत्तर प्रदेश)

नारी के मन मौन की गूँजती चीत्कार है,

नारी होना क्या दोष है? जिस पर होता अत्याचार है।


नेता बदले सियासत बदली और बदली सरकार है,

क्या उम्मीद करें जब आदमी से आदमिय्यत ही दरकिनार है।


कहते देश को अपना भारत महान

जहाँ करते नारी की इज़्ज़त को तार-तार हैं,

क्या यही भारतीय संस्कृति की सोच,संस्कार,विचार हैं।


घर-घर में होतीं बेटी,माताएँ और बहनें हैं,

कभी न भूलो जानो सब नारी से ही संसार है।


अपनी और पराई भी नारी तो होती नारी है,

मानवता गर ज़िन्दा हो तो दुनिया सुंदर सारी है।


हे वहशी दरिंदो क्रूरों तुम

तुम्हारी सोच दूषित विकार है,

जो नारी का करते शोषण उत्पीड़न

वो नरभक्षी कलयुगी अवतार है।

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