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जाने कैसा मौसम है - मुरारी यदुनाथ सिंह

Sunday, December 6, 2020

/ by Dr Pradeep Dwivedi

 मुरारी यदुनाथ सिंह, लखनऊ

खुद को  खुद  से  रूठा पाया, जाने  कैसा  मौसम  है।

कुछ अपना कुछ लगे पराया, जाने कैसा मौसम है॥


है  अनबन  अपने  ही  मन  से , कैसे   देखूँ   अंतर्मन,

कोहरा  घना  बहुत  है  छाया, जाने   कैसा मौसम है।


यादों    की   गरमाहट   है  जलते    हुए   अलाव   में,

अहसासों  ने  खूब  रुलाया,  जाने   कैसा  मौसम  है।


टप-टप   कर  आँसू  हैं  टपके , पत्ता-पत्ता   रोया  है,

कोई खत पुराना  हमने पाया, जाने  कैसा मौसम है।


बहुतेरे  सितम-ए-गम, सहर-ओ-शाम  हमारे साथ,

दर्द  उतर  आँखों   में  आया,  जाने   कैसा  मौसम है।

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