Responsive Ad Slot

देश

national

कुछ दोहे - पूनम शर्मा पूर्णिमा

Wednesday, December 9, 2020

/ by Dr Pradeep Dwivedi

 पूनम शर्मा पूर्णिमा ( अलीगढ़ )

दग्ध हुई धरती उधर , जल - व्यय इधर अपार !

इसीलिए घटता रहा, जल - तल बारंबार ।।


गोमुख से चल कर नदी , हरे जगत की प्यास !

कल - कल अविरल बह रही , पिया मिलन की आस ।।


सपन सदा सिंचित करें , ज्यों बिरवा का ध्यान !

बिन पोषण निष्प्राण सब , रखें सृष्टि का मान ।।


सत्य , समर्पण , साधना , अब किसको दरकार !

निष्ठा- परिधि रही नहीं , नेह बना व्यापार ।।


हृदय - भूमि बंजर भई , सूखौ नैनन नीर !

नेह - तलैया रिक्त हैं , कौन बँधावै धीर !!

No comments

Post a Comment

Don't Miss
© all rights reserved
Managed By-Indevin Infotech-Leading IT Company