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कुछ मुक्तक (वीरों के नाम ) - ममता शर्मा

Monday, December 14, 2020

/ by Dr Pradeep Dwivedi
ममता शर्मा, बंगलौर


१)

बहन सकल इस देश की देती हैं वरदान 

सीमा प्रहरी बन अटल खड़े जो हैं अविराम 

दुआ हमारी कवच बन देगी सुख आसीस 

चंदन पग-रज सकल है नमन तुम्हें बलराम 

२)

जिनके डर से दूर तक सीमा रहे निशब्द 

जिनके श्रम से देश को सुख चैन रहे उपलब्ध 

सैनिक मेरे देश के करें गर्जन कल्लोल  

देख के जलवे युद्ध में विश्व खड़ा स्तब्ध !

३)

भारत के जाँबाज़ हैं मेरे देश के वीर 

इनकी शक्ति के समक्ष टिकते नहीं कोई तीर 

जब आ जाएँ अपनी पर ठोक के सीना तान 

एक झपट्टा मार कर छीन ही लें ये कीर (कश्मीर)।

४)

सोते हैं ये धरा पर खाते सूखे पात 

फ़ौलादी फिर भी बने इनके सुंदर गात

ऐसे मेरे देश के सैनिक वीर-जवान 

चाहे कोई देश हो ये देंगे उसको मात !

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