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दलहन - तिलहन की फसल अब छुट्टा मबेशी के हवाले

Saturday, December 12, 2020

/ by Editor

हरिकेश यादव-संवाददाता (इंडेविन टाइम्स)

अमेठी। 

०केवल खानापूर्ति बनकर रह गई सरकारी सुबिधा

जिस तरह से सरकार ने फरमान जारी किया। उसका असर अब किसानों की रसोई तक  दिखाई देने लगा। अब चना, मटर, मसूर, अरहर की उपज मंडी में जाना कम हो चला है। अब तो अन्नदाता किसान ही बाजारों से दाल खरीद कर परिवार, अतिथियों को भोग लगावा रहा हैं। 

अरसहनी के किसान अशोक कुमार मिश्र कहते हैं  कि पहले नील गाय आयीं। अब गाय और बछड़े आ गये। सब दलहन - तिलहन की फसल नष्ट कर रहे हैं। इनके लिए सरकार की योजना फेल हैं। गोशाला तो सरकार का एक प्रचार है। जितना गोशाला में गायें है, उनसे ताकतवर छुटटा गाय और बछड़े है। 

भेटुआ के किसान दिनेश कुमार कोरी कहते हैं कि जो चुनाव जीत कर गये वे ही किसानों को भूल गए। सपा ने दाल के पैकेट बाटे तो  भाजपा चना के पैकेट बाट रहीं हैं। दलहन के खेतों की सुरक्षा कौन करेगा। दाल कब तक खरीद कर खायेंगे। सरकार को किसान के बारे में सोचने के लिए समय नहीं है। 

पूरबगांव के किसान संजय कुमार तिवारी कहते हैं कि किसान चना, मटर आदि की खेती धीरे-धीरे बन्द कर दिया। क्या करें पहले नील गाय आयीं तो कांग्रेस की केन्द्र सरकार ने "घेरवाड योजना" चलायीं। जिसमें खेतों के मेड़ पर कटीले तार लगवाने के लिए अनुदान दिया जा रहा था। दस फीसदी अंशदान किसानों को जमा करना पड़ता था। अब भाजपा की सरकार आयीं। तो किसान के फायदे मन्द योजना बन्द कर दी। अब जानवरों को छुटटा छोड़ने के फरमान जारी कर दिया है। इससे किसानों की गृहस्थी उजड़ जा रही है। 

ककवा के किसान अशोक कुमार  कहते हैं कि दहलन - तिलहन का मिनीकीट बिभाग ही हजम कर ले गए। सत्ता के दबाव में जांच भी नहीं होतीं हैं। चना, मटर, अरहर की फसल का प्रर्दशन हवा हवाई हैं। चना, मटर का बीज अब तो अधिकांश बाजारों में बेचकर योजना की खाना पूर्ति हो रही हैं। बिभाग कमीशन पा रहा है। इस नाते योजना कागज पर दौड रही हैं। छुट्टा जानवरों पर अंकुश लगाये। 

बेनीपुर के किसान धीरेन्द्र कुमार कहते हैं कि दलहन प्रर्दशन के लिए चना, मटर के बीज हैदराबाद, राजस्थान से मगाया जाता है। इतना  लग रहा हैं सरकार की आंखें बंद हैं। राजनीतिक दलों के नेताओं का खेल अब किसान ही खोलेगे। इस समय जंगली सुवर आलू की खेती को नुकसान पहुँचा रहे हैं।

पीपरपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत भादर ,टीकरमाफी,ढेमा,छीड़ा, कुरंग,रामगंज, दुर्गापुर,त्रिसुंडी, रायपुर,पीपरपुर, लहना, मोचवा, नेवढ़िया, घोरहा, अयोध्यानगर ,भावापुर, ,नरवहनपुर, में गौशाला मात्र कागजों तक ही सीमित हैं।यहाँ के किसान अपनी फसलों की सुरक्षा छुट्टा जानवरों से करने में असमर्थ हैं।वे दिन  रात फसलों की रक्षा करने के लिये ठंड भरी सर्दी में रहने को मजबूर है फिर भी  प्रशासन सब कुछ जानते हुए भी अनजान है।आवारा पशु किसानों को देखते ही दूर भाग जाते हैं।किसानों के हटते ही वे फसलो को भारी नुकसान पहुचाते है।

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