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जयन्ती पर याद किये गए भारतरत्न महामना मदन मोहन मालवीय और अटल बिहारी बाजपेयी

Saturday, December 26, 2020

/ by Indevin Times

कौस्तुभ बाजपेयी-इंडेविन न्यूज़ नेटवर्क

महोली -सीतापुर 

o गरीबों से है बादशाहत तुम्हारी: विमलेश

o सुगंधित वाटिका को कौन माली फूंक देते हैं- अभ्युदय

                           

मानबिंदु उत्थान समिति के तत्वाधान में आयोजित शैक्षिक एवं आध्यात्मिक गोष्ठी में भारत रत्न महामना पं. मदन मोहन मालवीय जयंती मनाई गई।कार्यक्रम में अटल जी की उपलब्धियों को याद करते हुए उनके चित्र पर पुष्प अर्पित किए गए।

                           

इस अवसर पर कमलेश मिश्र ने  सरस्वती वन्दना "देती है माँ तू सबको दुआएं, इसलिए दर पे आये हुए हैं"  के साथ काव्य पाठ का शुभारंभ किया।

बृजकान्त बाजपेयी ने काव्य पाठ करते हुए सुनाया "अपने घर की रखउ सफाई हाथन केरी करउ धुलाई, कर्फ्यू का उपहास करऊना, घर बाहर निकालउ ना, देश में आइगा कोरउना",

बाल गोविंद द्विवेदी ने "ये कैसी तकदीर लिखी है अपने यहां किसान की" कविता के माध्यम से किसानों का दर्द बयान किया।

समिति गीत "मान बिंदु समिति की महिमा बड़ी महान, गाय और गंगा, गीता की महिमा करे बखान" गीत सुधीर मिश्र ने एवं समिति की प्रार्थना कौस्तुभ बाजपेयी ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन शान्तन दीक्षित ने किया।

इस अवसर पर क्षेत्र के प्रसिद्ध भजन गायक विमलेश बाजपेयी ने "यह तन आपका है, प्रभु मन आपका है,कृपा की जो न हो आदत तुम्हारी तो सुनी ही रहेगी अदालत तुम्हारी भजन सुनाया"

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व उपजिलाधिकारी एवं पूर्व सामान्य प्रबन्धक चीनी मिल महोली गिरीश दत्त त्रिपाठी, पूर्व प्राचार्य राम बाबू द्विवेदी उपस्थित रहे।

कृषक इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य सचेन्द्र मिश्र ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राधाकृष्ण शुक्ल ने कहा कि मालवीय जी और अटल जी दोनों का जीवन चिरकाल तक युवाओं का मार्गदर्शन करेगा।

कार्यक्रम के अंत में संरक्षक डॉ हर्षवर्धन शुक्ल ने कहा कि शिक्षा के द्वारा ही कोई चाणक्य आज भी चन्द्रगुप्त पैदा कर सकता है। मालवीय जी महान शिक्षाविद् थे, उन्होंने 1915 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) की स्थापना की और बीएचयू जैसे संस्थान के सपने को हकीकत में बदलने के लिए बहुत कठिन मेहनत की। जब उन्होंने यूनिवर्सिटी खोलने के लिए निजाम से आर्थिक मदद मांगी थी तो निजाम ने मदद देने से इनकार कर दिया था इसके बाद उन्होंने  फंड जुटा कर विश्वस्तरीय संस्थान समाज को दिया।

                         

कार्यक्रम में ख्याति प्राप्त कवि राजकुमार तिवारी ने मानबिंदु में शामिल गीता जयंती पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गीता हमारी संस्कृति है।

मनोज मिश्र ने कहा कि यह समिति हमारी धरोहरों को सहेजने के लिए 28 वर्षों से निरंतर प्रयासरत है।

                         

कार्यक्रम में अभ्युदय ने कविता नयन जब खोल कर देखा, लगा जो मोह माया है, और कृषक  मजबूर है  कविता सुनाई। कार्यक्रम में निर्वाण तिवारी, नितिन समेत अनेकों कवियों ने काव्य पाठ किया। सभी कवियों एवं विद्वानों समेत सभी प्रमुख वक्ताओं का माल्यार्पण कर अंगवस्त्र भेट किये गए।

                         

                          

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से नीरज बाजपेयी,सतीश त्रिवेदी, शिव बरदानी, अनिल मिश्र, मनोज मिश्रा, अजय शुक्ल, पिंटू मिश्र, राजकुमार तिवारी, रामआसरे अवस्थी, राजीव शुक्ला, हिमांशु मिश्र, अभ्युदय, राजीव अग्निहोत्री,अम्बुज, विनायक समेत अनेकों साहित्य एवं काव्य प्रेमी उपस्थित रहे।

                          


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